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एचपीयू में खूनी संघर्ष, एससीए भंग

8 वर्ष पहले
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शिमला। हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी में छात्र गुटों के बीच खूनी संघर्ष में दर्जनों छात्र घायल हुए। इस घटना के बाद प्रशासन ने एससीए को भंग कर दिया है। छात्रसंघ चुनाव पर भी रोक लग सकती है। सोमवार सुबह करीब 10 बजे कैंपस में एबीवीपी और एसएफआई के बीच खूनी टकराव हुआ। देखते ही देखते दोनों ओर से तलवारें और रॉड्स चलीं, जिसके चलते दर्जनों छात्रों को चोटें आईं। स्थिति को तनावपूर्ण होते देख पुलिस ने लाठीचार्ज किया। कैंपस में एंट्रेस एग्जाम के पहले दिन ही छात्र संगठनों में इस प्रकार के खूनी संघर्ष से आम छात्र सहम गए। लाठीचार्ज से गुस्साए छात्रों ने पुलिस पर भी पथराव किया।

शुरू में नाकाम रही पुलिस


सुबह जब दोनों छात्र गुटों में संघर्ष शुरू हुआ तो पुलिस स्थिति को नियंत्रण में नहीं कर पाई। दोपहर तक स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई। छात्रों ने समरहिल चौक पर सरेआम तलवारें लहराईं। इसी बीच झड़प के दौरान एबीवीपी कार्यकर्ता नरेश दास्टा के हाथ मे' गहरी चोट आई। वहीं, एसएफआई कार्यकर्ता विक्रम कायथ और जीता सिंह नेगी को भी चोटें आई हैं।

जांच कमेटी गठित


खूनी संघर्ष को लेकर डीन ऑफ स्टडीज की अध्यक्षता में एक जांच समिति बनाई गई है। इसमें कुलसचिव, डीएसडब्ल्यू, चीफ वार्डन और कुलपति के सचिव भी सदस्य बनाए गए हैं।

हॉस्टल भी होंगे बंद


प्रशासन होस्टल बंद करने की तैयारी कर रहा है। यूनिवर्सिटी की कार्यकारिणी परिषद ने पहले ही साफ कर दिया था कि यदि इसी तरह हिंसा जारी रही तो छात्रसंघ चुनाव बैन कर दिए जाएंगे।

5 बजे बंद होगी लाइब्रेरी, दोबारा होगी परीक्षा


एचपीयू में हिंसा को देखते हुए प्रशासन ने निर्णय लिया है कि पांच बजे ही लाइब्रेरी को बंद किया जाएगा। एमएमसी और एमएससी मैथेमेटिक्स की लिखित परीक्षा दोबारा होगी। यूनिवर्सिटी परिसर में लड़कों के चार छात्रावासों को तुरंत प्रभाव से शांतिव्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को सौंप दिया गया है। सभी छात्रावासों में रहने वाले छात्रों को अतिथि छात्र को रखने की अनुमति नहीं होगी।

फ्लैश बैक

एचपी यूनिवर्सिटी में अब तक तीन बार खूनी संघर्ष हो चुका है। इससे पहले आठ अप्रैल को एबीवीपी और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं के बीच खूनी टकराव हुआ था। दोनों ओर से करीब छह छात्रों को चोटें भी लगी थी। इसके बाद 22 अप्रैल को एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने कुलपति को कैंपस में आने से रोक दिया था। इस कारण पुलिस और एबीवीपी के बीच हाथापाई हुई। 11 मई को भी देर रात हॉस्टलों में एबीवीपी और एसएफआई कार्यकर्ताओं में भी लड़ाई हुई।
टेस्ट देने से डरे छात्र
प्रोफेशनल कोर्सिस की परीक्षा देने आए छात्रों की जुबां पर एक ही बात थी कि हिंसात्मक माहौल के बीच वह कैसे टेस्ट दें। एक छात्रा दिव्या का कहना है कि वह अब कभी भी एचपीयू परीक्षा देने नहीं आएगी। छात्र संगठनों की मारपीट के बीच उन्हें कैंपस में आने में भी डर लगने लगा है। अन्य छात्र दीपेश, रश्मि, देवेंद्र और राकेश का कहना है कि हिंसा बंद होनी चाहिए।
आरोप-प्रत्यारोप
छात्र संगठन एबीवीपी और एसएफआई ने एक दूसरे पर मारपीट करने का आरोप लगाया है। छात्र संगठन एबीवीपी के कैंपस सचिव कुशल कौंडल का कहना है कि एसएफआई कार्यकर्ताओं ने देर रात हॉस्टल में ही लड़ाई की रणनीति बनाई थी। प्लानिंग के साथ एसएफआई ने उनके कार्यकर्ताओं पर हमला किया गया है। उधर, एसएफआई के कैंपस अध्यक्ष पुनीत धांटा का कहना है कि एबीवीपी कार्यकर्ता पिछले एक सप्ताह से उन पर हमला कर रहे हैं।
आगे की तस्वीरों पर क्लिक करके देखिए पूरा घटनाक्रम...