(जालपा मंदिर )
अवाहदेवी। जालपा माता अवाहदेवी मंदिर परिसर कमेटी के चयन को लेकर उपजा विवाद गहराता जा रहा है। यह ऐतिहासिक मंदिर हमीरपुर और मंडी दो जिलों के साथ-साथ पूर्व सीएम प्रो. प्रेमकुमार धूमल की कुलदेवी भी है। हमीरपुर की समीरपुर, बगबाड़ा, चंबोह तथा धर्मपुर की चाेलथरा और ग्रयोह कुल मिला कर पांच पंचायतों की संगम स्थली है। जिस तरह से नियमों को ताक पर रख कर नई कमेटी का चयन किया गया है, उस पर चार पंचायतों के प्रतिनिधियों ने भौंवे तान ली हैं, जबकि एक नवगठित कमेटी के पक्ष में खड़ी है।
अग्रिम जमानत ली
पुरानी मंदिर परिसर समिति ने 3 दिसंबर को पुलिस चौकी अवाहदेवी में इसकी प्राथमिक रिपोर्ट दर्ज करवाई है। इस पर आरोपियों ने 4 दिसंबर को अग्रिम जमानत ले ली है। अब पंचायत प्रतिनिधि भी इस बखेड़े में कूद गए हैं।
क्या कहते हैं प्रधान
पहली कमेटी के प्रधान ओम प्रकाश शर्मा का कहना है कि बैठक की कार्रवाई शुरू होते ही हमसे रिकॉर्ड छीन कर इन लोगों ने हमें बाहर निकाल दिया और कमेटी भंग होने से पहले ही चुनावी प्रक्रिया शुरू कर दी। जबकि दूसरी कमेटी के प्रधान सुरजीत ठाकुर का कहना है कि सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 2006 के मुताबिक समितियां 3 साल के लिए चुनी जाती हैं, मगर पुरानी कमेटी 2006 में बनी थी और उसे 2011 तक काबिज रहने बाबत प्रस्ताव डाला था, लेकिन उसके तीन साल और बीत जाने के बावजूद चुनाव करवाने को राजी नहीं थे। मुझे इलाके के करीब 100 प्रधानों ने चुना है।
बहरहाल इस मामले को लेकर अब चार पंचायतों के प्रतिनिधियोें ने खुलकर विरोध किया है। उनका कहना है कि चुनाव को आनन-फानन में करवाया गया है। चुनाव के दौरान पांचों पंचायतों के प्रतिनिधियों को शामिल हाेना चािहए था पर एेसा नहीं हुआ। अब इन प्रतिनिधियों ने इन चुनाव को विरोध किया है।