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गैस सिलेंडर की भी होती है एक्सपायरी डेट, ऐसे कर सकते हैं जांच...

6 वर्ष पहले
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शिमला। सिलेंडर फटने और लीकेज होने की घटनाएं अक्सर सुनने में आती हैं। कई बार इन हादसों कारण लापरवाही तो कभी इनके आउटडेटेड होने के कारण इस तरह के हादसे होते हैं। थोड़ी सी सावधानी बरत कर इनसे बचा जा सकता है। घरों में उपयोग किए जाने वाले गैस सिलेंडर की भी एक्सपायरी डेट होती है। अगली बार जब आपके घर में जब सिलेंडर आए या जिस सिलेंडर का आपके घर में उपयोग हो रहा है उसकी एक बार जांच जरूर कर लें की कहीं सिलेंडर की एक्सपायरी डेट तो नहीं निकल गई है।
सिलेंडर के ऊपर की तरफ जहां हम रेग्युलेटर लगाते हैं उसके बगल में लोहे की तीन पट्टियां लगी रहती हैं। उन्हीं में से किसी एक पर A, B, C, D के साथ नंबर लिखे रहते हैं। गैस कंपनियां बारह महीनों को चार भागों में बांटकर इनके बैच बनाती हैं। ए- ग्रुप में जनवरी से मार्च तक। बी- ग्रुप में अप्रैल से जून तक। सी- में जुलाई से सितंबर और डी- में अक्टूबर से दिसंबर तक के बेच बनाए जाते हैं। इन बेच में वर्ष के अनुसार इनकी नंबरिंग की जाती है। बी-13 का मतलब सिलेंडर की एक्सपायरी डेट जून, 2013 है। सी-14 का मतलब सितंबर, 2014 के बाद सिलेंडर का इस्तेमाल खतरनाक है।
ये होता है खतरा
यदि एक्सपायरी के बाद का सिलेंडर का उपयोग किया जाता है तो सिलेंडरों के वॉल्व से लीकेज होने की संभावना रहती है। अगर आपके यहां इस तरह के सिलेंडर एक्सपायर्ड सिलेंडर मिलने पर उपभोक्ता एजेंसी को सूचना देकर सिलेंडर को बदलवा सकते हैं। गैस एजेंसी के बदलने से मना करने पर खाद्यय विभाग से शिकायत कर सकते हैं। उपभोक्ता फोरम में मामला दायर कर सकते हैं।
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