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भारत में यहां आते हैं ज्यादा विदेशी, मलाणा क्रीम और आईस चरस का लेते मजा

8 वर्ष पहले
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शिमला। पूरे हिमाचल प्रदेश को इस समय प्रकृति ने सफेद चादर ओढ़ा दी है। झरने नदियां सब जम गए हैं। इन्हें निहारने हजारों की संख्या में पर्यटक हिमाचल पहुंच रहे हैं। ऐसा नहीं है कि लोग सिर्फ इन्ही कारणों से यहां आते हैं। कुल्लू के मलाणा गांव पर चलाई जा रही विशेष श्रृंखला के तहत आज हम आपको बता रहे हैं यहां की प्रमुख फसल भांग के बारे में... जिसे मलाणा क्रीम और आइस चरस भी कहा जाता है।
कुल्लू जिले का मलाणा ग्राम अपनी आनोखी परंपराओं से ज्यादा यहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय स्तर की भांग के कारण जाना जाता है। यही कारण है कि यहां पर स्थानीय लोग कम विदेशी सैलानी (यूथ) सबसे ज्यादा आते हैं। वह भी एक दो दिन के लिए नहीं महीनों और सालों के लिए। दुनियां में सबसे अच्छी भांग यहां पैदा होती है। यहां की भांग (चरस) को मलाणा क्रीम और आइस चरस भी कहा जाता है। यहां हो रहे इस गैरकानूनी कामों और बिगड़ती सामाजिक व्यवस्था पर एक बोम नाम का वृत्तचित्र भी बन चुका है।
सबसे पुरानी लोकतांत्रिक व्यवस्था
ऐसा दावा किया जाता है कि मलाणा में दुनियां की सबसे पुरानी लोकतांत्रिक प्रणाली है। इसका पालन भी आज तक किया जा रहा हैं। यहां की बोली ग्रीक से मिलती जुलती है। मलाणा के लोग अपने आपको सिकंदर की फौज के सैनिकों का वंशज मानते हैं। कहा जाता है कि सिकंदर युद्ध के बाद जब लौट रहा था तब उसकी सेना के कुछ सैनिक यहीं रुक गए थे। मलाणा तक आसानी से नहीं पहुंचा जा सकता। दुर्गम रास्ते से होते हुए यहां पैदल पहुंचा जाता है। दुर्गम पहाड़ों की उचाईयों पर बसा वह गांव जिसके ऊपर और कोई आबादी नहीं है।
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