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मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की टीम पहुंच गई, अफसर करते रहे तैयारी

7 वर्ष पहले
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शिमला. ...सर, अभी ताला लगा है पांच मिनट बाद िफर आते हैं। अरे कोई चाबी तो लेकर आओ। कुछ ऐसा ही नजारा था आईजीएमसी का। वह भी तब जब मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की टीम अस्पताल का इंस्पेक्शन कर रही थी। इस दौरान सर्जरी ओपीडी ब्लॉक के कुछ कमरों पर ताला लटका था। कमरों में ताला लटका देख एमसीआई के निरीक्षक भी हैरान थे। आनन-फानन में कमरे में लगे ताले को खोलने के लिए टीम के साथ चल रहे एक डॉक्टर ने कहा सर पांच मिनट के बाद यहां आते तब तक आगे की जांच कर लेते हैं।

पौने नौ बजे पहुंची टीम
एमसीआई की टीम वीरवार सुबह पौने नौ बजे ही आईजीएमसी पहुंची। इससे आईजीएमसी प्रशासन में हड़कंप मच गया। टीम के पहुंचने तक अस्पताल में पूरे डॉक्टर भी नहीं पहुंच पाए थे। टीम के इस तरह अचानक पहुंचने से प्रशासन को तैयारियां करने का ज्यादा मौका नहीं मिला। एमसीआई की टीम में तीन सदस्य निरीक्षण के लिए आए हैं। कोई डॉक्टरों को जल्दी आने के लिए फोन करने लगा तो कोई पैरामेडिकल स्टाफ को। एमसीआई की टीम के अचानक इस तरह से पहुंचेगी यह आईजीएमसी प्रशासन ने भी नहीं सोचा था। टीम के समय से पहले पहुंच जाने के कारण आईजीएमसी का एमबीबीएस की सीटों को बचाने का जुगाड़ तंत्र धरा का धरा रह गया।
टीम बोली, ऐसी होती है माइनर ओटी
टीम के निरीक्षक ने कैजुअल्टी में माइनर ओटी की जांच करने के लिए जैसे ही अंदर घुसे तो वे इसकी हालत देखकर हैरान रह गए। एक निरीक्षक ने इस पर तुरंत कहा कि ऐसी होती है माइनर ओटी! आईजीएससी का कोई भी प्रशासनिक अधिकारी जवाब नहीं दे पाया। इसके अलावा केजुअल्टी में लगे स्ट्रेचरों को लेकर भी एमसीआई के निरीक्षक ने कई सवाल खड़े किए। ओटी में न लाइट की व्यवस्था थी न ही टेबल की बेहतर व्यवस्था थी।
डॉक्टर को आया गुस्सा
एमसीआई टीम साथ चल रहे आई विभाग के डॉ. केपी चौधरी मीडियाकर्मियों को देखकर नाराज हो गए। निरीक्षक के साथ चलते हुए एक दम बोल पड़े फोटो क्यों खींच रहे हो। तुम पत्रकार हो, यहां तुम्हारा क्या काम है। इतना कहते हुए निरीक्षक के पीछे-पीछे निकल गए।
अंत तक बैठकें फिर भी तैयारी अधूरी
एमसीआई की टीम के दौरे को लेकर प्रिंसिपल डॉ. एसएस कौशल ने विभागों के डॉक्टरों के साथ बैठकें की। बैठकों का दौर टीम के आने से एक दिन पहले तक चलता रहा। इसके बाद भी जांच के दौरान जिस तरह से आईजीएमसी में कमियां को उजागर कर रहे थे। उससे आईजीएमसी के प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। आईजीएमसी के प्रिंसिपल बैठकों की बजाय अगर खुद कमरों का दौरा कर चेक कर लेते तो वीरवार को टीम के सामने जो हुआ शायद उससे बच जाते।