जानलेवा हो सकती है खुले में फेंकी दवाइयां

9 वर्ष पहले
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बरठीं। घुमारवीं-शाहतलाई मुख्य सड़क पर बाड़ी व बरड़ के पास सड़क किनारे पर कुछ प्राइवेट क्लीनिकों ने सैकड़ों दवाइयों के स्ट्रिप फेंक दिए गए हैं। जिनका अनजाने में बच्चे या आवारा पशुओं द्वारा प्रयोग किए जाने से किसी भी प्रकार की अनहोनी की घटना हो सकती है।
कूड़े के ढेर में पड़ी ये दवाइयां इंसानों के साथ-साथ पशुओं के लिए भी जहर का काम करके मौत का सबब बन सकती हैं। प्रदेश सरकार व पर्यावरण नियंत्रण विभाग प्रदेश को हरा भरा एवं वातावरण को शुद्ध बनाए रखने के लिए प्रति वर्ष करोड़ों रुपए खर्च कर रहे हैं, लेकिन आम जनता के सहयोग के बिना यह प्रयास हवा हो रहे हैं।
कुछ लोगों की लापरवाही के कारण जहां आम जनता व पशुओं को खतरा है, वहीं पर्यावरण संतुलन भी लगातार बिगड़ रहा है। नियमानुसार इन दवाइ,यों को स्ट्रिप से निकालकर गड्ढे में दबाया जाना था, लेकिन कुछ शरारती तत्वों द्वारा यह खुले में फेंक दी गई हैं जिससे वह आम आदमी व बच्चों की पहुंच में आकर किसी भी प्रकार की अनहोनी का कारण बन सकती हैं।
कौन-कौन सी दवाइयां
अवैध रूप से फेंकी गई दवाइयों में क्रश, लिवोशिप, जैड अम्रिता, श्वेत, फी टोन, रीअल जाईम, रीमोगोल्ड, अरसोनाईल व अन्य दवाइयां फैंकी गई हैं।
सख्त कार्रवाई की मांग
बरसात के दिनों में इन दवाइयों व कचरे का विषला पानी साथ लगती सीर खड्ड में मिलता है। जिस पर दर्जनों पेयजल व सिंचाई योजनाएं हैं। इन योजनाओं के माध्यम से यह पानी लोगों के घरों तक पहुंचता है जो कभी भी किसी बड़ी बीमारी का कारण बन सकता है। क्षेत्र के लोगों ने स्वस्थ्य विभाग व पर्यावरण नियंत्रण विभाग से गंदगी फैलाने वालों व खुले में दवाइयां फेंकने वालों के खिलाफ सख्त कारवाई की मांग की है।
> एक्सपाइरी डेट की दवाइयां खुले मे फैंकना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि इन दवाइयों को गड्ढे में दबा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार खुले में फेंकी गई दवाइयों की जांच कर उचित कारवाई की जाएगी।
-डॉ. डीआर सहगल, सीमएओ बिलासपुर