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बाबा रामदेव के बाद टीम अरविंद केजरीवाल के सदस्य भी सरकार के निशाने पर

9 वर्ष पहले
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शिमला। सोलन जिला के साधुपुल में बाबा रामदेव को लीज पर दी गई जमीन को कब्जे में लेने के बाद सरकार अब पूर्व सरकार द्वारा गलत ढंग से जमीन लीज पर देने के मामलों को खोलने की तैयारी में है।
इनमें टीम अरविंद केजरीवाल के सदस्य प्रशांत भूषण और कुछ प्राइवेट यूनिवर्सिटियों को दी गई जमीन के मामलों का रिकार्ड राजस्व विभाग खंगाल रहा है।
सरकार ने अधिकारियों को मामले की जांच करने के आदेश दिए हैं। अधिकारियों की तरफ से जांच रिपोर्ट आते ही सरकार इस मामले में जल्द कार्रवाई अमल में लाएगी।
यह है मामला
टीम अन्ना के सदस्य प्रशांत भूषण की तरफ से वर्ष, 2010 में पालमपुर के कंडवाड़ी में 4.66 हेक्टेयर जमीन कुमुद एजुकेशनल सोसाइटी के नाम से खरीदी गई। कांग्रेस का आरोप है कि पूर्व प्रदेश सरकार ने यह अनुमति नियमों को ताक पर रखकर दी। पालमपुर में उनको चाय बागान खरीदने की अनुमति देने के अलावा भूमि का उपयोग (लैंड यूज) बदलने की अनुमति दी गई। लैंड सिलिंग एक्ट में भी छूट दी, ताकि भूषण बाद में यह जमीन अपने परिवार वालो के नाम कर सके। कांग्रेस ने विपक्ष में रहते हुए सत्ता में आने पर इसी जांच करवाने की बात कही थी।
यह हैं जांच के दायरे में
बाबा रामदेव को लीज पर दी गई जमीन कैंसल करने के बाद सरकार ने टीम अन्ना के सदस्य प्रशांत भूषण की जमीन को जांच के दायरे में ला दिया है। प्रदेश में खुली 15 प्राइवेट यूनिवर्सिटी को दी गई जमीन की भी जांच होगी। साथ ही धारा-118 के तहत हुए अन्य जमीनी सौदे भी शामिल है। इसमें कुछ बिल्डरों से संबंधित मामले भी है।
यह होंगे पड़ताल के पहलू
पालमपुर में प्रशांत भूषण की तरफ से खरीदी गई जमीन में किस तरह से लैंड यूज बदला गया। पूर्व सरकार ने किन नियमों के तहत छूट दी। चाय बागान जिसे नहीं बेचा जा सकता, उसकी जमीन कैसे बिकी।
सच्चाई सामने लाएंगे
राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर का कहना है कि प्रदेश सरकार बाबा रामदेव को दी गई जमीन अपने कब्जे में लेने के बाद अब टीम अन्ना के सदस्य प्रशांत भूषण को दी गई जमीन के मामले की जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि जांच कार्य को पूर्ण पारदर्शिता से किया जाएगा और सरकार सच्चाई सामने लाएगी। इसके अलावा प्रदेश में हुए अन्य भूमि सौदों की जांच की जाएगी।