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'रिश्ते' और 'मर्डर' के बिसात में फंसे कांग्रेसी विधायक ने 48 दिन बाद किया सरेंडर

9 वर्ष पहले
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चंडीगढ़। ‘दैनिक भास्कर’ की 48 दिन तक चली मुहिम के बाद हिमाचल प्रदेश की दून विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक रामकुमार चौधरी ने आखिरकार मंगलवार को पंचकूला कोर्ट में सरेंडर कर दिया। पुलिस पंचकूला के ज्योति मर्डर केस में उनकी तलाश कर रही थी।
पुलिस ने विधायक पर 2 लाख और अन्य आरोपियों परमजीत, धर्मपाल और गुरमीत पर 50-50 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया था। सरेंडर के बाद कोर्ट ने उन्हें छह दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। विधायक दिसंबर से फरार चल रहे थे।
चौधरी को दोपहर बाद जनरल अस्पताल में लाया गया। यहां चौधरी ने डॉक्टरों को बताया कि उन्हें कुछ परेशानी है। इसके बाद चौधरी का ब्लड सैंपल लिया गया और ईसीजी टेस्ट करवाया गया। मेडिकल जांच में सब ठीक पाए जाने पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
अब पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठना भी शुरू हो गए हैं। दो दिन पहले ही रामकुमार चौधरी, गुरमीत, परमजीत, धर्मपाल पर पुलिस ने इनाम रखा, लेकिन ड्राइवर सतपाल पर किसी तरह के इनाम की घोषणा नहीं की। पुलिस ने सतपाल को भी आरोपी बनाया है। वहीं, बताया जा रहा है कि रामकुमार पंचकूला में ही थे।
क्या है मामला
22 नवंबर को पंजाब के होशियारपुर की रहने वाली ज्योति पंचकूला में मृत पाई गई थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि लड़की की मौत सिर पर चोट के कारण हुई है। रिपोर्ट से यह भी पता चला कि उसका गर्भपात कराया गया था। जब लड़की के मोबाइल फोन से कॉल डिटेल निकाली गई तो विधायक जांच के दायरे में आए। लड़की के पिता ने की शिकायत के बाद चौधरी पर केस दर्ज हुआ।
धर्मशाला में इंतजार कर रही पुलिस
डीसीपी अंबाला अशोक कुमार की अध्यक्षता में एक टीम धर्मशाला भी गई थी। माना जा रहा था कि रामकुमार धर्मशाला में होने वाले विधानसभा सत्र के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हो सकते हैं। 27 दिसंबर को कोर्ट ने चौधरी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। चौधरी चार बार विधायक रहे चुके लज्जा राम के बेटे हैं।
अन्य आरोपी अब भी फरार
पुलिस के लिए चुनौती खत्म नहीं हुई है। इस मामले के अन्य आरोपी गुरमीत, परमजीत, धर्मपाल, सतपाल अब भी फरार हैं। इन पर भी पुलिस ने 50-50 हजार रुपए का नकद दनाम रखा है। यह भी माना जा रहा है कि अन्य आरोपी की रामकुमार की तरह सरेंडर कर सकते हैं। हालांकि, पुलिस उनकी तलाश में जगह-जगह छापे मार रही है।
कार्रवाई पर फैसला जल्द: वीरभद्र
हिमाचल के सीएम वीरभद्र सिंह ने रामकमुार की गिरफ्तारी पर कहा कि कानून अपना काम कर रहा है। प्रदेश पुलिस भी इस मामले में कार्रवाई करेगी। दोषी या निर्दोष होने का निर्णय अदालत लेगी। किसी भी तरह की कार्रवाई परजल्द फैसला लेंगे।
महिला उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं: धूमल
विपक्ष के नेता प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि रामकुमार चौधरी को पहले ही आत्मसमर्पण कर देना चाहिए था। इस मामले की जल्द सुनवाई हो जिससे सच्चई सामने आ सके। महिला उत्पीड़न के मामले में कोई ढील बरती गई तो भाजपा कड़ा संज्ञान लेगी।
चौधरी बोले- मैं गायब नहीं था, दौरे पर गया था
मंगलवार सुबह १क्.३५ मिनट पर रामकुमार चौधरी मुंह छिपाते हुए सीजेएम कोर्ट पहुंचे और सरेंडर किया। चौधरी ने सिर्फ इतना की कहा- मैं गायब नहीं था, दौरे पर गया था। मैं ज्योति को नहीं जानता। मेरा इस मामले से कुछ लेना-देना नहीं है। पुलिस की पूरी मद करूंगा।
पत्रकार को धमकी
कोर्ट में पेशी के बाद रामकुमार के समर्थकों ने डे एंड नाइट चैनल के पत्रकार कुलबीर को धमकी दी और उससे हाथापाई करने का प्रयास किया। कुलबीर ने बताया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ शिकायत की गई है।
यूं चला भास्कर इन्वेस्टिगेशन
विधायक रामकुमार चौधरी के सरेंडर में भास्कर की अहम भूमिका रही। भास्कर ने ही सबसे पहले खुलासा किया था कि इस केस में रामकुमार चौधरी शामिल हैं। इसके बाद सिलसिलेवार ढंग सारी सच्चाई सामने लाई।
> पहले दिन पुलिस केस को संदिग्ध बता रही थी, जबकि पोस्टमार्टम में साबित हुआ कि ज्योति का कत्ल हुआ है। कत्ल के पहले ज्योति प्रेगनेंट थी और उसका अबॉर्शन करवाया गया।
> मामले में रामकुमार का नाम सामने आते ही पुलिस ने जांच ठप कर दी। एसएचओ अजय राणा ने जांच छीन ली और जिम्मा एसीपी वरिंदर सांगवान को दिया गया।
> जांच धीमी पड़ने पर भास्कर ने सिलसिलेवार तरीके से मामले को उठाया। एक व्यक्ति के मोबाइल नंबर का खुलासा किया, जो कत्ल के वक्त वहां था।
> दून हलके से चुनाव लड़ रहे रामकुमार चौधरी की करीबी थी। फोन डिटेल से खुलासा किया कि कत्ल के दिन रामकुमार चौधरी भी घटनास्थल पर मौजूद थे।
> ज्योति की बहन की शादी में रामकुमार चौधरी की मौजूदगी की फोटो तक प्रकाशित की। फिर साबित किया कि रामकुमार भी मौके पर ही मौजूद थे।
> ज्योति को इलेक्शन कैंपेन में इस्तेमाल किया गया था। पिता के अनुसार पैसों के लेनदेन का जिम्मा ज्योति संभाल रही थी। अकाउंट में पैसा ट्रांसफर होने की बात साबित की।
> अवैध तरीके से सेक्टर 21 के नर्सिग होम में अबॉर्शन का खुलासा किया। हरियाणा के मुख्यमंत्री से बात की और बताया कि मामले को दबाया जा रहा है।
> भास्कर इनवेस्टिगेशन के साथ कई समाज सेवी संस्थाएं भी जुड़ गईं। 20 दिसंबर को हिमाचल विधानसभा के चुनाव का रिजल्ट आया। इसमें रामकुमार जीत गए।
> ज्योति के कत्ल 30 दिन बाद रामकुमार चौधरी सामने आए। भास्कर की इनवेस्टिगेशन के आधार पर पुलिस ने कहा कि रामकुमार हत्या में शामिल हैं।
> भास्कर की मुहिम के चलते ही पुलिस ने विधायक और अन्य आरोपियों के खिलाफ इनामी राशि की घोषणा की। लिहाजा विधायक को सरेंडर करना पड़ा।