शिमला। राज्य सरकार का पूर्व आईपीएस अधिकारी एएन शर्मा के खिलाफ अभियोजन मंजूरी मामला तूल पकड़ गया है। भाजपा ने इसे राजनीति से प्रेरित बताते हुए सरकार से पूछा कि एएन शर्मा के साथ कृष्ण देव के विरुद्ध भी अभियोजन मंजूरी देगी। या कांग्रेसी होने के कारण उनके विरुद्ध मंजूरी नहीं दी जाएगी। पार्टी ने कहा कि क्या यह दोहरा मापदंड नहीं है कि एएन शर्मा के विरुद्ध जिसने समय से पूर्व अपना इस्तीफा वापस ले लिया था और दूसरा व्यक्ति जिसने पुनः सेवा ज्वाइन की उसको छोड़ दिया जाएगा। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार दोहरे मापदंड अपनाकर अलग-अलग मामलो में अलग अलग निर्णय ले रहे हैं जो सरकार के निरंकुश और भेदभावपूर्ण कार्य करने की नीति को दर्शाते हैं।
भाजपा ने मुख्यमंत्री के बयान पर तीखी टिप्पणी की है। जिसमें हिमाचल में राष्ट्रपति शासन न होने और चुनी हुई सरकार होने की बात कही है। पार्टी ने कहा कि किसी भी पार्टी ने राज्य में राष्ट्रपति शासन होने की बात नहीं कही है। युवा कांग्रेस ने भाजपा कार्यालय पर पथराव कर गुंडागर्दी करने के विरुद्ध राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर सरकार की कार्यप्रणाली चौपट होने और प्रशासनिक व्यवस्था चरमराने की बात राज्यपाल से मिलकर पार्टी द्वारा की गई थी।
भाजपा ने आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का बयान राज्यपाल को डराने का प्रयास है। प्रदेश में राष्ट्रपति शासन न होकर चुनी हुई सरकार बताया जाना इस बात को दर्शाता है कि मुख्यमंत्री राज्यपाल की भूमिका को चुनौती दे रहे हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री अपने पुत्र को बचाने के लिए जांच को प्रभावित कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट से पहले क्लीन चिट दी जा रही है। भाजपा ने कहा कि पथराव में पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ता राजेश शारदा की आंख लगभग चली गई है। 5 अन्य लोगों को गहरी चोटें आई है। पार्टी ने मुख्यमंत्री से पूछा कि उनकी पार्टी के कौन से तीन कार्यकर्ताओं के फ्रैक्चर हुए हैं। उस फ्रैक्चर की मेडिकल रिपोर्ट को मुख्यमंत्री को सार्वजनिक करना चाहिए।