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रेल बजट : हिमाचल प्रदेश को मिला एक्स. ट्रेन व स्किल डेवलपमेंट सेंटर

9 वर्ष पहले
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शिमला. रेल बजट में इस बार हिमाचल प्रदेश के लिए तीन नई लाइनों के सर्वे को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा ऊना से हुजूर साहेब नांदेड़ तक एक एक्सप्रेस ट्रेन भी मिली है। नई रेल लाइनों में धर्मशाला-पालमपुर, अंब-कांगड़ा वाया नादौन व बद्दी-बिलासपुर शामिल हैं। नेशनल स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत शिमला को भी चुना गया है।
ऊना-नंगल डैम हुजूर साहेब नांदेड़ नई एक्सप्रेस (साप्ताहिक) आनंदपुर साहिब, मोरिंडा, चंडीगढ़ व अंबाला से होकर जाएगी। कालका-साईंनगर, शिरडी एक्सप्रेस ट्रेन वाया हजरत निजामुद्दीन, भोपाल और इटारसी होकर चलेगी। यह हफ्ते में दो दिन ही चलेगी। इससे भी प्रदेशवासियों को काफी फायदा होगा।
इन परियोजनाओं पर नहीं हुई बात
पठानकोट-जोगेंद्रनगर रेल लाइन अब भी नेरोगेज हैं। इस ट्रैक को ब्रॉडगेज करने की मांग को इस बार बजट में शामिल नहीं किया गया।
पठानकोट-जोगेंद्रनगर के लिए पहले ६ ट्रेनें चलती थीं, लेकिन अब इनकी संख्या घटकर २ रह गई है। संख्या बढ़ाने की घोषणा नहीं हुई।
शिमला-कालका ट्रैक को हेरिटेज घोषित किए जाने के बाद इस लाइन को ब्रॉडगेज नहीं किया जा सकता, लेकिन इस रूट के साथ एक अन्य ट्रैक की मांग काफी समय से उठ रही है। बजट भाषण में चर्चा नहीं हुई।
8 अप्रैल 1983 को मौजूदा मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने रेलवे का एक ड्रीम प्रोजेक्ट भेजा था। प्रस्ताव किया गया था कि रोपड़ से रामपुर व आगे रोहड़ा तक रेल लाइन का विस्तार किया जाए। लगातार मामला उठाते रहने के बावजूद केंद्र सरकार ने प्रदेश में रेल विस्तार को महत्व नहीं दिया। पुराने ट्रैक की मरम्मत के लिए भी बजट नहीं मिला है।
प्रदेश के पर्यटन को मिलेगा फायदा : वीरभद्र
सीएम वीरभद्र सिंह ने कहा कि नई रेल लाइनों के सर्वे से राज्य में पर्यटन और उद्योगों को फायदा होगा। केंद्रीय मंत्री ने हिमाचल में रेल विस्तार को अधिमान दिया है। जल्द ही इन परियोजनाओं की रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
हर बार की तरह प्रदेश की अनदेखी : धूमल
पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल ने कहा है कि प्रदेशवासियों को रेल बजट से काफी उम्मीदें थे, लेकिन केंद्र सरकार ने हिमाचल की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। प्रदेश सरकार अपने हकों को केंद्र में उठाने में नाकाम रही है।
ये घोषणाएं अधूरी
चंडीगढ़-बद्दी-नालागढ़ रेल से जोड़ने की योजना पर अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है।
नंगल तक आने वाले गरीब रथ को ऊना तक बढ़ाने की योजना भी पूरी नहीं हो पाई।
भानुपल्ली-बैरी रेल लाइन के लिए इस बार भी अभी तक कागजों में ही बन पाई है। भानुपल्ली से धरोट तक जमीन अधिग्रहण का काम २क्१क्-११ में शुरू हुआ था, लेकिन यह मामला भी अभी तक सिरे नहीं चढ़ पाया है।
पूर्व रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र के कार्यकाल में नंगल-तलवाड़ा रेल लाइन के लिए सर्वे हुआ था। 42 किलोमीटर लाइन ही बिछ पाई है। इसे पठानकोट तक जोड़ने की योजना बनाई गई थी।
प्रदेश में रेल सेवा की स्थिति
हिमाचल में अभी तक कालका से शिमला, अंबाला से अंब-इंदौरा और पठानकोट से जोगेंद्रनगर तक रेल सुविधा उपलब्ध है। इसमें कालका-शिमला और पठानकोट-जोगेंद्रनगर नेरोगेट है। अंब-अंदौरा ही एक मात्र ब्रॉडगेज है।