शिमला । सरकार द्वारा लाए नगर एवं ग्राम योजना (संशोधन) का विरोध शुरु हो गया है। जन कल्याण समिति चक्कर ने आरोप है कि सरकार द्वारा लाए संशोधन से 5 प्रतिशत भवन भी नियमित नहीं होंगे। सरकार को वोट की राजनीति से ऊपर उठकर इस अध्यादेश को लाने की तैयारी करनी चाहिए। जन कल्याण समिति की बैठक सोमवार को चक्कर में अध्यक्ष ब्रिगेडियर लाल चंद जंबाल (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में हुई। बैठक में नगर एवं ग्राम योजना (संशोधन) अध्यादेश पर चर्चा हुई।
समिति ने ये दिए तर्क
- वर्टिकल डेविएशन की शर्त पहली बार सामने आई है।
- एनएच और अन्य सड़कों के किनारे अनुमोदित नक्शों के आधार पर बने भवनों से एनओसी अनुचित है।
- भवन के पार्किंग में खुली दुकानों को अध्यादेश में नियमित करने का प्रावधान नहीं है।
- आवासीय भवनों को नियमित करने के लिए जो दरें हैं वो आम आदमी की पहुंच से बाहर है।
फिर विचार करे सरकार
जन कल्याण समिति चक्कर के महामंत्री कीर्ति शर्मा ने सरकार से मांग की है कि इस अध्यादेश पर फिर से विचार किया जाए। सरकार द्वारा पािरत अध्यादेश जनहित में नहीं है। इस पर पुन:र्विचार किए जाने की जरूरत है। अध्यादेश ऐसा हो जिससे आम लोगों को फायदा मिल सके।
एक सप्ताह बाद भी नहीं पहुंची चेक लिस्ट
टीसीपी एक्ट में संशोधन कर अध्यादेश ला दिया है। इसके तहत आवेदन करने के लिए 45 दिन की समयावधि तय की है। सप्ताह भर बीतने के बावजूद अब तक नगर निगम शिमला में चेक लिस्ट नहीं पहुंची है। इसके बगैर निगम किसी का भी आवेदन स्वीकार करने की स्थिति में नहीं है। आवेदन स्वीकार करना तो दूर, निगम के अधिकारी इसके अभाव में लोगों को आवेदन कैसे करना है, यह भी नहीं बता पा रहे हैं। शिमला नगर निगम ही नहीं प्रदेश के सभी नगर निकायों में यही स्थिति है। अकेले नगर निगम शिमला में ही चार हजार से अधिक भवन मालिक भवनों को नियमित करवाने के लिए निगम कार्यालय में आवेदन करेंगे। चेक लिस्ट न पहुंचने से भवन मालिकों को आवेदन में देरी हो सकती है। 45 दिन में सारे दस्तावेज जमा नहीं हुए तो लोग भवन रेग्युलर करवाने के लिए आवेदन से वंचित रह जाएंगे।