शिमला। हिमाचल में राइट टू एजूकेशन (आरटीई) कानून के तहत निजी स्कूलों में गरीब बच्चों को पढ़ने का मौका मिल सकता है। राज्य शिक्षा विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार किया है। इसेे निजी स्कूलों में लागू करने के लिए धर्मशाला में शुक्रवार को होने वाली राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में प्रस्ताव लाया जा सकता है।
मंत्रिमंडल की बैठक में शिक्षा विभाग के प्रस्ताव को हरी झंडी मिली तो आने वाले सेशन में आर्थिक रूप से कमजोर (इकॉनाेमिकली वीकर सेक्शन) छात्रों को 25 फीसदी सीटों पर एडमिशन देना जरूरी होगा। राज्य सरकार गरीब बच्चों की फीस की अदायगी कैसे करेगी, इसपर भी मंत्रिमंडल में ही सहमति के बाद फैसला होगा। प्रदेश के कुछ स्कूलों ने इस नियम को 2010 में फॉलो किया था लेकिन ज्यादातर स्कूलों ने नोटिफिकेशन को नहीं माना। राज्य में पिछले पांच सालों से इसे लागू करने की कसरत चल रही है। केंद्र ने आरटीई को 2010 में लागू किया गया था। इस एक्ट को प्रदेश सरकार ने 2013 में नोटिफाई कर दिया है। इस एक्ट के तहत निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए 25% आरक्षण अनिवार्य है। प्रदेश में 18000 सरकारी और 2500 प्राइवेट स्कूल हैं। ये स्कूल सीबीएसई और स्कूल शिक्षा बोर्ड से एफिलेटिड हैं।
यूं मिलेगा एडमिशन
आरटीई के अनुसार किसी गरीब छात्र के घर के डेढ़ किलोमीटर के दायरे में कोई सरकारी प्राइमरी या तीन किलोमीटर के दायरे में अप्पर प्राइमरी स्कूल नहीं है, तो वह बच्चा नजदीकी प्राइवेट स्कूल में एडिमशन ले सकता है। पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी। प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई के इच्छुक छात्रों को संबंधित शिक्षा खंड के बीपीईओ या फिर डिप्टी डायरेक्टर एजुकेशन के पास आवेदन करना पड़ेगा।
सरकार बनाएगी नियम
आरटीई लागू करने के लिए सरकार नियम बनाने जा रही है। प्राइवेट स्कूल में छात्रों की एडमिशन कैसे होगी। छात्रों को फीस का पैसा किस तरह रिफंड होना है। इसके नियम बनाए जाएंगे। सर्वशिक्षा विभाग ने खाका तैयार कर सरकार को भेज दिया है। अब अंतिम फैसला राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में होना है।