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निर्माण में पांच साल की देरी, करोड़ों का नुकसान, दूसरी कंपनी को दिया ठेका

6 वर्ष पहले
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शिमला। 111 मेगावॉट क्षमता की सावड़ा कुड्डू जलविद्युत परियोजना का निर्माण कार्य समय पर पूरा न होने से राज्य सरकार को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। परियोजना से हिमाचल को बिजली मिलना तो दूर, देरी की वजह से इस की कॉस्ट 50 फीसदी बढ़ गई है।
वर्ष 2007 में परियोजना की टनल का काम शुरू हुआ। पूर्व निर्धारित लक्ष्य के तहत परियोजना की टनल का निर्माण 2011 तक पूरा होना था। हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन ने 10 अक्टूबर 2007 में टनल निर्माण के लिए टेंडर निकाला। टनल निर्माण की लागत 154.60 करोड़ तय की गई। चेन्नई की कंपनी मै. केसी ज्वाइंट वेंचर को 115,91,61,063.00 में टेंडर आवंटित किया। कंपनी ने पावर कॉरपोरेशन की आेर से टनल निर्माण की तय लागत राशि से भी कम पर काम लिया। निर्माण कार्य में देरी के बाद निगम ने कंपनी के साथ करार को रद्द कर दिया। नए सिरे से इसका टेंडर दूसरी कंपनी को दिया गया। हालांकि निर्माण कार्य को लेकर पहले के कर्मचारियों के साथ विवाद अभी तक चल रहा है। इस कारण दूसरी कंपनी निर्माण कार्य शुरू नहीं कर सकी है।
पूरी टनल का काम 115 में आैर आधी का 179 करोड़ में
पावर कॉर्पोरेशन ने अक्टूबर 2007 में सावड़ा कुड्डू परियोजना के लिए टनल निर्माण के लिए टेंडर निकाला। मै. केसी ज्वाइंट वेंचर को 115,91,61,063.00 में यह कार्य दिया गया। कंपनी ने समय पर कार्य नहीं किया। नियमों के तहत करार को खत्म कर दूसरी कंपनी को टेंडर दिया गया। खुदाई का कार्य 85 फीसदी पूरा होने के बाद यह टेंडर 179 करोड़ में दिया गया। पहले कार्य कर रही कंपनी 9548 मीटर की खुदाई कर चुकी थी। हालांकि निगम ने नए सिरे से किए टेंडर में कई काम जोड़े हैं, बावजूद इसके बढ़ी हुई लागत से किया टेंडर गले नहीं उतर रहा है।
करार रद्द करने से पहले 52 करोड़ की पेमेंट

टनल निर्माण का कार्य कर रही कंपनी के साथ करार रद्द करने से पहले 52 करोड़ की पेमेंट कर दी थी। सवाल यह उठता है कि कॉरपोरेशन को जब पता था कि कंपनी कार्य अनुबंध की शर्तों के अनुसार नहीं कर रही है तो पहले करार रद्द क्यों नहीं किया गया। इतनी पेमेंट क्यों पहले ही कर दी गई।