(सांकेतिक फोटो)
मंडी. कुल्लू के रघुनाथ मंदिर में चोरी के बाद अब मंडी के अराध्य देव माधोराय के मंदिर में हाई लेजर बीम सिक्योरिटी लगाने की कवायद शुरू हो गई है। ये प्रदेश का पहला मंदिर होगा जहां इस तरह की सुरक्षा व्यवस्था होगी। ऐसी व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय संग्रहालयों में होती है। पुलिस ने इसके लिए औपचािरकताएं पूरी कर जिला प्रशासन से वित्तीय व्यवस्था का आग्रह किया है। मंदिर के गर्भगृह में रखी गई मूर्ति उठाने या छेड़छाड़ पर भी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू होगी।
अज्ञात के एंट्री पर हूटर बजेगा
यदिअनाधिकृत व्यक्ति बीम से गुजरेगा तो तुरंत मंदिर परिसर में हुट्टर बजेगा। ये एक किलोमीटर तक सुनाई देगा।
गर्भगृह में लगेगा लेजर बीम
नईव्यवस्था के तहत देव माधोराय के गर्भगृह में जाने से पहले हाई सिक्योरिटी लेजर बीम से गुजरना होगा।
10 मोबाइल नंबरों पर जाएंगे एसएमएस
पुलिससहित अन्य 10 मोबाइल नंबरों पर एमरजेंसी मैसेज फ्लैश होंगे। इससे अनाधिकृत व्यक्ति को तुरंत पकड़ा जाएगा।
सिक्योरिटी की सिफारिश
देवमाधोराय मंदिर में हाई लेजर बीम सिक्योरिटी लगाने की सिफारिश जिला प्रशासन से की है। इस संबंध में औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। - मोहितचावला, एसपीमंडी।
जिले के सभी मंदिरों की गूगल से सर्विलेंस शुरू
मंडी पुलिस ने जिला के सभी मंदिरों की जानकारी एकत्रित करने के साथ-साथ उन पर गूगल से सर्विलेंस शुरू कर दी है। प्रदेश में पहली बार टेंपल सिक्याेरिटी ब्रांच बनाकर उसमें सभी मंदिरों का डाटा एकत्रित किया जाएगा। अधिकांश मंदिरों को पुलिस ने अपने स्तर पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। सीसीटीवी कैमरों के लिए तकनीकी सहायता जिला पुलिस उपलब्ध करवाई जाएगी। जिन मंदिरों की अधिक आमदानी या संपत्ति है उन्हें गर्भगृह में डबल बैरेल लॉकिंग सहित चेस्ट की व्यवस्था होगी। देव स्थलों से संबंधित पुलिस थानों को हर 15 दिन में मंदिरों का व्यक्तिगत निरीक्षण कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश जारी किए हैं।
1765 विक्रमी संवंत में राजा माधोराय की मंदिर में स्थापना की गई। सोहलवीं सदी में मंडी के राजा सूरजसेन अपने 18 पुत्रों के एक के बाद एक कालग्रसित होने पर अपना राज्य भगवान विष्णु के प्रतीक माधोराय को समर्पित कर स्वयं राज्य का संरक्षक बन राजकाज देखने लगे। मंडी के भीमा सुनार ने माधोराय की प्रतिमा बनाई। इसकी स्थापना 15 फाल्गुन 1765 विक्रमी संवंत को की गई। शिवरात्रि में माधोराय की शोभायात्रा के साथ ही उत्सव का शुभारंभ होता है। इसमें देश-िवदेश से लोग शिरकत करते हैं।