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डाउनलोड करेंहरिपुरधार। चेस्ट पेन से पीडि़त एक 18 वर्षीय युवती 12 घंटे तक दर्द से कहराती रही, लेकिन पीएचसी हरिपुरधार में उसे प्राथमिक चिकित्सा सुविधा भी मुहैया नहीं हो सकी। युवती को पीएचसी में रात्रि करीब 12.30 बजे पहुंचाया गया, लेकिन वहां डॉक्टर नदारद थे जिस कारण उसे चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाई। पीएचसी हरिपुरधार में एक सप्ताह के भीतर यह दूसरा मामला है। जब मरीज को प्राथमिक उपचार भी नसीब नहीं हुआ।
ये है मामला
सोमवार देर रात को घुरत निवासी लायकराम की 18 वर्षीय पुत्री ममता को अचानक सीने में तेज दर्द उठी। परिजन रात को ही उसे पीएचसी हरिपुरधार ले आए। रात करीब 12.30 बजे जब वह हरिपुरधार पहुंचे तो डॉक्टर पीएचसी से नदारद थे। रात को वहां पर एकमात्र कर्मचारी तैनात था जिसने मरीज के परिजनों को बताया कि यहां पर डॉक्टर नहीं है। उसके बाद परिजनों ने जब 108 नंबर पर डायल कर एंबुलेंस सेवा की मांग की तो उन्हें बताया गया कि हरिपुरधार में डॉक्टर मौजूद नहीं है। यदि मरीज को संगड़ाह ले जाना है तो 108 एंबुलेंस सेवा उपलब्ध हो जाएगी, लेकिन परिजनों ने संगड़ाह के लिए एंबुलेंस सेवा लेने से मना कर दिया है। परिजन लड़की को टैक्सी से राजगढ़ ले गए। राजगढ़ में प्राथमिक उपचार के बाद उसे डॉक्टरों ने सोलन के लिए रेफ र कर दिया।
लड़की के पिता ने बताया
लड़की के पिता लायक राम शर्मा ने बताया कि संगड़ाह जाने से उन्होंने इसलिए मना कर दिया था क्योंकि हरिपुरधार से सोलन व शिमला नजदीक पड़ता है। शर्मा ने बताया कि संगड़ाह से मरीज को नाहन रेफ र किया जाता है। उन्होंने कहा कि दो दिन का समय रेफ र करने में ही बीत जाता है जब तक मरीज को शिमला व चंडीगढ़ पहुंचाया जाता है। इस दौरान तब तक मरीज दम तोड़ देता है।
लिखित में करें शिकायत
बीएमओ संगड़ाह ने बताया कि हरिपुरधार पीएचसी में संगड़ाह से एक डॉक्टर को प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है। उन्होंने बताया कि प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया डॉक्टर वहां पर दिन-रात सेवारत है। यदि वह ड्यूटी में किसी भी प्रकार की कोताही बरत रहा है तो उसकी लिखित शिकायत उन्हें भेज दे। लिखित शिकायत मिलने के बाद ही वह डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं।
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