शिमला. शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए शुरू किए गए रूसा की कमियां छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। कॉलेजों में हॉबी विषय की कक्षाओं को शुरू तो किया गया है, लेकिन इसे पढ़ाने वाला कोई नहीं हैं। हैरानी की बात यह है कि एचपीयू की ओर से 68 हॉबी विषयों को कॉलेजों में शुरू तो किया गया है, लेकिन इसे पढ़ाने के लिए न तो स्टाफ की व्यवस्था की गई और न ही इसके लिए सलेबस बनाया गया है। फर्स्ट सेमेस्टर में विवि प्रशासन की ओर से खुद ही पेपर सेट किए गए थे, जबकि जो पढ़ाई छात्रों ने की थी उसमें से कोई भी प्रश्न परीक्षा में नहीं आया था। अब कॉलेज प्रबंधन अौर एचपीयू के बीच हाॅबी कक्षाअों को लेकर खींचतान चल रही है। एचपीयू प्रशासन कॉलेजों को हॉबी विषय के पेपर सेट करने के लिए दबाव बना रहा है, जबकि कॉलेज प्रबंधन इससे इनकार कर रहे हैं। एचपीयू के प्रो. वीसी प्रो. राजेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि हॉबी विषय को लेकर जल्द ही एक बैठक होगी। उसके बाद कोई निर्णय लिया जाएगा।
ये-ये हैं हॉबी सब्जेक्ट्स
कॉलेजों में ई कॉमर्स, साइबर लॉ, विंडो ऑपरेटिंग सिस्टम, होम क्राफ्ट्स, बेसिक क्रॉकरी, टेक्सटाइल, पर्सनलिटी एंड योग, बेसिक अकाउंटिंग, लीडरशिप स्टाइल, डिजाइनिंग, क्रिएटिव राइटिंग, भारतीय संस्कृत, डांस, म्यूजिशियन जैसे हॉबी विषय को पढ़ाया जाना हैं। इसके लिए अलग से किसी भी शिक्षक की तैनाती नहीं हैं।
इसलिए जरूरी विषय
हॉबी विषय में क्रेडिट के हिसाब से नंबर दिए जाते हैं। एक क्रेडिट के 25 नंबर जोड़े जाते हैं।
हॉबी विषय काे इसीलिए भी जरूरी माना जाता है, इससे उक्त छात्र का स्कोर परीक्षाओं में बढ़ता है।
छात्रों को पढ़ाई के साथ प्रोफेशनल कोर्स करने का भी मौका मिल जाता हैं, ऐसे में इसे शुरू किया गया था।
हॉबी कक्षाओं को लगाने की अनुमति तो प्रशासन ने दे दी, लेकिन पढ़ाएगा कौन अभी तक कोई जानकारी नहीं है।
मैथ टीचर, सिखाए म्यूजिक?
सरकार के दबाव में रूसा को लागू तो कर दिया, लेकिन जिम्मेवारियां तय नहीं हैं। ....प्रिंसिपल हिंदी के शिक्षक को बेसिक अकाउंटिंग, लीडरशिप स्टाइल, डिजाइनिंग हॉबी विषय को पढ़ाने के लिए कहा जा रहा है, जबकि उसे इसकी जानकारी ही नहीं हैं।
इसी तरह गणित के शिक्षक म्यूजिक सीखने के लिए कहा जा रहा है, जबकि उन्हें इसकी बेसिक नॉलेज ही नहीं हैं।
आर्थिक तंगी के कारण छात्रों के लिए शिक्षकों की तैनाती से प्रशासन अपने हाथ पीछे खींच रहा है।