शिमला। एचपीयू में पीजी कक्षाओं के आर्ट्स की परीक्षाएं शुरू हो गई हैं। परीक्षा के पहले दिन ही छात्रों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। अधिकतर छात्रों काे रोल नंबर ही नहीं मिल पाए, जिस कारण उन्हें परीक्षा देने से वंचित होना पड़ा है। वहीं, प्रशासन की माने ताे उनका कहना है कि छात्रों को रोल नंबर भेज दिए गए थे, लेकिन जिन्हें नहीं मिले है, वह कट आॅफ लिस्ट में नाम होने पर परीक्षा दे सकता हैं।
छात्रों का आरोप है कि प्रशासन ने कट आॅफ लिस्ट में नाम ही नहीं डाला है, ऐसे में उन्हें परीक्षा में बैठने नहीं दिया जा रहा हैं। हालांकि, प्रशासन की ओर से छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी थी। सोमवार को अधिकतर छात्र परीक्षा शाखा में रोल नंबर लेने पहुंचे, लेकिन यहां उन्हें कहा गया कि उनके फार्म ही नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में काफी देर तक परीक्षा शाखा में हंगामा होता रहा।
नहीं देने पड़ेंगे अतिरिक्त फीस
डुप्लीकेट रोल नंबर लेने के लिए पहले प्रशासन ने 200 रुपए फीस तय की थी। अब प्रशासन इस फीस को नहीं लेगा। परीक्षा नियंत्रक प्रो. श्याम लाल कौशल का कहना है कि छात्रों को उनके रोल नंबर भेज दिए गए हैं। जिन्हें नहीं मिले हैं, वह कट आॅफ लिस्ट में नाम होने पर परीक्षा दे सकते हैं। उनका कहना है कि प्रशासन डुप्लीकेट रोल नंबर लेने की भी फीस नहीं ले रहा है।
चार माह बाद पहुंचा रोल नंबर
छात्रा रुचि शर्मा समरहिल में रहती हैं। उनका एमए अंग्रेजी की सोमवार को परीक्षा थी। उनके घर की दूरी एचपीयू से मात्र सौ मीटर है। ऐसे में उन्हें भी चार माह बाद सोमवार को ही रोल नंबर मिला। उनका कहना है कि इससे पहले वह कई बार परीक्षा शाखा के चक्कर काट चुकी हैं। वहीं, कई छात्र ऐसे भी हैं जिनके फार्म न पहुंचने की बात प्रशासन कर रहा हैं। ऐसे में उन्हें रोल नंबर जारी नहीं हो रहे हैं।
सभी को परीक्षा में बैठने की अनुमति दें
छात्र संगठन एबीवीपी ने परीक्षा नियंत्रक का इस मामले को लेकर घेराव किया। संगठन के कैंपस अध्यक्ष नवनीत कौशल का कहना है कि प्रशासन परीक्षाओं के दौरान छात्रों को परेशान कर रहा है। छात्रों के रोल नंबर न भेजने के लिए भी उन्हें ही दोषी ठहराया जा रहा है। उनका कहना है कि प्रशासन सभी छात्रों को परीक्षाओं में बैठने की अनुमति दें, अन्यथा वह आंदोलन शुरू कर देंगे।
(फोटो- एबीवीपी कार्यकर्ता रोल नंबर न मिलने के विरोध में परीक्षा नियंत्रक को ज्ञापन सौंपते हुए।)