शिमला। आईजीएमसी में मरीजों को यूज्ड सिरिंज दिए जाने के मामले में अस्पताल प्रबंधन सवालों के घेरे में है। अस्पताल प्रबंधन ने अभी तक इस मामले को पुलिस के पास नहीं सौंपा है। अस्पताल कैंपस में ये सब कब से और कैसे चल रहा था। इसका अस्पताल प्रशासन के पास कोई जवाब नही है। हैरानी की बात है कि अस्पताल में खून से सनी सिरिंज मिलने के बाद भी प्रबंधन इस मामले की जांच खुद करने की बात कर रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने ड्रग इंस्पेक्टर को आईजीएमसी भेजा। उसने काउंटर में रखे सामान की जांच की। लोगों की जिंदगियों से किए जा रहे खिलवाड़ के बाद इस मामले को तुरंत पुलिस को सौंपा जाना चाहिए था। शिकायत और खून से सनी सिरिंज मिलने के बाद प्रबंधन ने काउंटर तुरंत बंद करने की बजाय केवल वहां से सामान ही जब्त किया है। बीते शनिवार को यूज्ड सिरिंज में खून के धब्बे के खुलासे के बाद अब एक नया खुलासा हुआ है। प्रबंधन ने जैसे ही अानन फानन में काउंटर पर छापा मारा तो यहां पर 25 यूज्ड सिरिंज भी बरामद हुई। अब इसमें सवाल खड़े हो गए है कि जब ट्यूब काउंटर पर ब्लड सैंपल लिए ही नहीं जाते तो इनके पास यूज्ड सीरिंज कहां से आई। आईजीएमसी गेट के पास स्थित आरकेएस की दुकान चला रहे भानू ठाकुर का कहना है कि मेरी दुकान से ऐसा कोई सामान नहीं रखा है।
मेरे पास पूरे सामान का बिल है। मेरी दुकान में काफी जगह है और मैं किसी ओर के काउंटर पर अपना सामान क्याें रखूंगा। वह झूठ बाेल रहा है। आईजीएमसी में चल रहे ट्यूब काउंटर से प्रबंधन ने आईबी सैट, यूरीन बैग, ब्लड फिल्टर सैट की पेटियां बरामद की है। काउंटर मालिक इन सब सर्जिकल आइटम को अपने काउंटर पर नहीं बेच सकता है। आईजीएमसी में मरीजों को डर सताने लगा है। खुलासे के बाद मरीज और उनके तीमारदार सिरिंज की बारीकी से जांच कर रहे हैं। मरीजों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही भारी पड़ रही है। ऐसे में आईजीएमसी प्रबंधन किस तरह की सुविधाएं दे रहा है। जिन लोगों ने एक सप्ताह पहले काउंटर से सिरिंज ली थी, उन्हें ज्यादा डर सता रहा है।