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तीन विषय, एक टीचर और तीन टॉपर

8 वर्ष पहले
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शिमला। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी के बावजूद बच्चे मैरिट सूची में अव्वल रहे हैं। वोकेशनल कोर्स में मेरिट में पहले और तीसरे स्थान पर रहे दो छात्र शिमला जिला के दूरदराज क्षेत्र ननखड़ी से हैं। इस स्कूल में वोकेशनल कोर्स में शिक्षकों के तीन पद खाली होने के बावजूद बच्चों ने अपने दम पर बेहतर प्रदर्शन किया। कार्यरत तीन शिक्षकों में से दो पीटीए और एक अन्य एसएमसी पर काम कर रहा है।

केस स्टडी: ननखड़ी स्कूल
सीनियर सेकंडरी स्कूल ननखड़ी में वोकेशनल कोर्स टेंपरेरी तौर पर चल रहा है। यहां पर इलेक्ट्रानिक्स का एक पद खाली और एक भरा है। इलेक्ट्रानिक्स विषय की जिम्मेदारी घनश्याम शर्मा पर है। इनके मार्गदर्शन में बेहतर परिणाम सामने आए। इसके अलावा हार्टिकल्चर विषय में अशोक मेहता पीटीए पर सेवाएं दे रहे हैं,

जबकि दूसरा पद खाली है। जीएससी का पद खाली है। वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर एसएमसी पर यशपाल की सेवाएं ली जा रही हैं। अंग्रेजी विवेक मेहता के पास है। वे हिमाचल प्रदेश पीटीए के प्रदेश अध्यक्ष हैं।

स्कूल में इस समय प्लस वन और प्लस टू में 16-16 छात्र पढ़ रहे हैं। प्रदेश के करीब 15 हजार सरकारी स्कूलों में इस समय अलग-अल श्रेणी में शिक्षकों के करीब 10,000 पद खाली हैं। करीब 1,300 सीनियर सेकंडरी स्कूलों में करीब 1,688 स्कूल लेक्चरर पद खाली है। प्रिंसिपल के करीब 250, हेडमास्टर के 356 पद, डीपीई के 32 पद, टीजीटी आट्र्स के 400, टीजीटी नॉन मेडिकल के 700 पद खाली हैं।

मनोवैज्ञानिक नजरिया -डॉ. रोशन जिंटा
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग प्रमुख डॉ. रोशन जिंटा का तर्क है कि ग्रामीण परिवेश के बच्चों की सफलता का राज दृढ़ संकल्प है। ये बच्चे लक्ष्य तक पहुंचने के लिए पूरी क्षमता से आगे निकल जाते हैं। ग्रामीण बच्चों का बचपन अपेक्षाकृत अभावग्रस्त होता है।

कई वर्षों से लड़कियां लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। गांव की लड़कियां स्वभाव से अपेक्षाकृत गंभीर हैं। बारहवीं के परिणाम को बच्चों की ए से लेकर डी तक की श्रेणी में रखकर पर्सनेलिटी के तौर पर देखा जा सकता है। ए श्रेणी का बच्चा सब कुछ जल्दी से करके आगे निकलता है। बी श्रेणी में बच्चे कुछ ठहर कर आगे बढ़ते हैं। सी श्रेणी के बच्चे भी सामान्य तौर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार रहते हैं।

इन पर दें विशेष ध्यान
डी श्रेणी के बच्चों में डिप्रेशन के तत्व रहते हैं। ऐसे बच्चों के लिए घर और स्कूल में मानसिक रुचि को देखते हुए प्रोत्साहित करना चाहिए। ये बच्चे मन ही मन घुटते रहते हैं। पेरेंट्स रुचि के अनुसार उन्हें आगे बढऩे का अवसर दें।

नजर नहीं आए शिमला के स्कूल

शिक्षा बोर्ड की तरफ से घोषित किए परीक्षा परिणाम शिमला के स्कूल नजर नहीं आए। सिर्फ छोटा शिमला के छात्र सचिन ठाकुर कॉमर्स की मेरिट लिस्ट में स्थान दर्ज करवा सके। इसके अलावा लक्कड़ बाजार, टुटू, पोर्टमोर और संजौली जैसे स्कूल कोई खास करिश्मा नहीं दिखा पाए।

अंग्रेजी : 126 पीजीटी मिले
प्रदेश के सीनियर सेकंडरी स्कूलों में अब तक पिछली सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई भर्ती प्रक्रिया के तहत सिर्फ 126 पीजीटी (स्कूल लेक्चरर) शिक्षकों को रखा गया है। ये पद उन स्कूलों को दिए गए हैं, जहां पर पहले से शिक्षकों के पद खाली चल रहे थे।

शहरों में शिक्षक, गांव में कमी
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में इस समय ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की अधिक कमी है। इसके बावजूद इस बार ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। शहरी क्षेत्र में शिक्षक अधिक होने के बावजूद यहां का परिणाम अपेक्षा के अनुकूल नहीं रहा है।