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'मैडम, बिना काम वाला है महिला पुलिस सैल', महिलाएं ही इसे मिस यूज कर रहीं

8 वर्ष पहले
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हमीरपुर/शिमला। मैडम पुलिस विभाग से लेकर अन्य विभागों में महिलाओं को आम लोगों का सहयोग कम मिल रहा है। पुलिस महिला सैल को तो कई लोग बिना काम वाल सैल का नाम दे देते हैं। बीच में महिला आयोग की अध्यक्ष धनेश्वरी ठाकुर के फोन की घंटी बजती है। एक जिले से महिला नर्स का फोन था, जो डॉक्टर की ओर से उत्पीडऩ करने की शिकायत करती है।

शुक्रवार को यहां स्थित बचत भवन में मौका था, राज्य महिला आयोग की अलग-अलग विभागों के साथ बैठक कर कमेटियां गठित करने व शिकायतें सुनने का, लेकिन हैरानी की बात यह है कि 23 विभागों में से महत्वपूर्ण विभाग हेल्थ, पीडब्ल्यूडी, डीसी ऑफिसर, आईपीएच, वन विभाग व इलेक्ट्रिसिटी ऑपरेशन विभाग के नुमांइदे ही गैर हाजिर थे। जिस पर आयोग ने कड़ा नोटिस लेते हुए इससे जवाब मांगा जाएगा। यह विभाग इस लिए भी महत्वपूर्ण थे, क्योंकि यहां महिला कर्मचारियों की खासी तादाद है।

बैठक में एक महिला कर्मचारी का कहना था कि ड्यूटी के समय भी पिक एंड चूज किया जाता है। लोग मामले लेकर आते हैं, तो कई बार उन्हें यह सुनना पड़ता है कि उनकी बेटी की जगह आपकी बेटी होती तो क्या करती। इन शब्दों से उन्हें कार्य में बाधा आती है। आयोग ने पंचायतों व ब्लॉक स्तर पर महिला उत्पीडऩ कमेटियां गठित करने के भी निर्देश दिए।

पहले नाम दर्ज करो
आयोग के पास एक विवाहिता महिला पहुंची, जिसके साथ उसका ससुर व पंचायत उपप्रधान भी था। पति लंबे समय से लापता है। आयोग के हस्तक्षेप से ससुराल वाले उसे घर पर रखने को राजी हुए हैं। अब महिला चाहती है कि उसका ससुराल नाम दर्ज करे ताकि आगे समस्या न हो।

कई मामले हल
जिले से 30 मामले आयोग के पास हैं। आयोग ने मौके पर ही 7 का समाधान कर दिया, जबकि 5 मामले से संबंधित उपस्थित नहीं हुए। पत्रकार वार्ता में धनेश्वरी ठाकुर ने कहा कि परिवार बेटियों को आत्म निर्भर बनाने पर भी ठोस कदम उठाएं। आयोग के पास 1999 से अब तक 6 हजार 766 शिकायतें आई हैं। जिनमें 5 हजार 923 का निपटारा कर दिया गया है। 843 केस उन्नति पर है। उन्होंने कहा कि लिंग भेद के मामले में हमीरपुर की स्थिति अन्य जिलों के मुकाबले काफी बेहतर हैं, हर जिले में बैठक कर मामले सुलझाए जा रहे हैं।

अकेला पड़ गया पवन
जाहू क्षेत्र के पवन ने दूसरी जाति में विवाह किया, लेकिन आज उसकी पत्नी अलग रह रही है। वह परिजनों से भी अलग हो गया था। अब आयोग के समक्ष रोते हुए मामला हल करवाने की मांग रखी है। यही नहीं पत्नी का सताया राजेश भी परेशान है। उसने आयोग के समक्ष बताया कि जब भी पत्नी को साथ चलने को कहता है, तो वह जहर खाने की धमकी देती है। यही नहीं लिविंग रिलेशन मामले में एक युवती ने आयोग को बताया कि उसका पति ससुराल वालों ने लापता कर दिया है।

महिलाएं मिस यूज कर रहीं
धनेश्वरी ठाकुर का कहना था कि कई जगह महिलाएं जानबूझ कर कानून का मिसयूज कर रही हैं। ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं। उनका कहना है कि उनके एक वर्ष के कार्यकाल में कार्य स्थल उत्पीडऩ, पड़ोसी उत्पीडऩ व जमीन से संबंधित सैकड़ों मामलों का निपटारा किया गया है।

आयोग के आंकड़ों के मुताबिक पति व ससुराल द्वारा उत्पीडऩ मामलों में कांगड़ा जिला के 44, हमीरपुर में 17, कुल्लू में 40, मंडी में 28, शिमला में 90, सोलन में 28 मामले सामने आए हैं, जिनमें अधिकांश निपटाए जा चुके हैं। पड़ोसियों के उत्पीडऩ मामलों में कांगड़ा में 11, मंडी में 15, सिरमौर के 8 मामले हैं।