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मांगे पूरी नहीं हुई तो विधानसभा का घेराव करेंगी मिड डे मील वर्कर्स

7 वर्ष पहले
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शिमला। मिड डे मील वर्कर्स यूनियन आने वाले विधानसभा बजट सत्र के दौरान घेराव करेगी। अपनी मांगों को लेकर यूनियन ने विधानसभा घेराव की रणनीति तैयार की है। कालीबाड़ी सभागार में हुए सम्मेलन में यह रणनीति बनाई गई। यूनियन का आरोप है कि प्रदेश सरकार ने 10 वर्षों में मिड डे मील वर्कर्स के वेतन में एक रुपए की भी बढ़ोतरी नहीं की है। जबकि विधायकों और मंत्रियों के वेतन को बढ़ाया गया है। भाजपा व कांग्रेस की सरकार से सिर्फ आश्वासन ही मिले है। यूनियन की अध्यक्ष कांता महंत का कहना है कि मिड डे मील वर्कर्स को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के लाया जाए। साथ ही 5100 रुपए मासिक वेतन निर्धारित किया जाए। उनका कहना है कि महंगाई के इस दौर में महिलाओं को घर चलाना मुश्किल हो गया है। ऐसे में सरकार को सोचना चाहिए की इतने कम वेतन में कैसे घर का गुजारा चलेगा।
मिलती है सिर्फ 33 रुपए दिहाड़ी

मिड डे मील वर्कर्स यूनियन के महासचिव छवी राम का कहना है कि मिड डे मील के तहत जिन्हें रोजगार मिला है, उन्हें सिर्फ 33 रुपए दिहाड़ी मिलती है। एक वर्ष में सिर्फ 10 महीने ही वेतन दिया जाता है। दो महीने का वेतन नहीं दिया जाता है। उनका कहना है कि सरकार उन्हें पूरे 12 महीने का वेतन दें। उनका कहना है कि इस मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
कालीबाड़ी हाॅल में मिड डे मील वर्कर्स यूनियन का दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में भाग लेते मिड डे मील वर्कर्स।