एक घर के बाहर पिंजरे में एक तोता टंगा हुआ था, वहां से रोज एक सेठ जी निकलते थे।
एक दिन फिर सेठ जी वहां से गुजरे।
तोता- अबे, गंजे, मोटे तोंदू जरा वजन कम कर ले मिर्ची खाया कर मेरी तरह।
सेठ- चुप साले, रट्टू बैठा रह पिंजरे में।
दूसरे दिन फिर तोता-अबे, गंजे, मोटे तोंदू जरा वजन कम कर ले नहीं तो तेरी बीवी छोड़ देगी तुझे।
सेठ- अबे चुप हो जा बदतमीज नहीं तो तेरा टेंटुआ दबा दूंगा।
इस बार सेठ से बरदाश्त नहीं हुआ और वह तोते के मालिक के पास शिकायत के लिए घर में पहुंच गया।
सेठ- देखिए जनाब अपने हरामखोर तोते को समझा लीजिए, मुझसे हरकुछ बोलता है और सडक़ पर लोग मुझपर हंसते हैं। अबकी बार इसने मुंह खोला तो मैं इसका टैंटुआ दबा दूंगा।
मालिक बाहर आकर तोते से- देखो हीरा, आज के बाद तुमने सेठ जी से कुछ बोला न तो ठीक नहीं होगा।
तोता- ठीक है मालिक अब कुछ नहीं बोलुंगा।
अगले दिन सेठ फिर वहीं से निकला लेकिन तोता चुपचाप था।
सेठ आगे बढ़ा और थोड़ा पीछे मुडक़र देखा तो तोता चुपचाप था।
सेठ थोड़ा और आगे बढ़ा और पीछे मुडक़र देखा और सोचा की तोता कुछ बोलेगा, लेकिन तोता चुपचाप था।
इस बार सेठ तोते के पिंजरे के पास आया और मुस्कुराने लगा।
तोता- सेठ जी, आप समझ तो गए होंगे कि मैं आपसे क्या कहना चाह रहा हूं!