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तोती की मम्मी को तीरथ जाना था

8 वर्ष पहले
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तोती की मम्मी को तीरथ जाना था तो उसने सोचा अपनी जवान
तोती बिटिया को किसके पास छोडूं।
एक पेड़ पर बड़ा हरामखोर तोता रहता था उसकी आवरगी के किस्से मशहूर थे।
तोती की मम्मी ने सोचा यदि इससे रखवाली करने को कहूंगी, तो ये तो मेरी तोती बिटिया के साथ
न जाने क्या..क्या..राम..राम..राम..राम!
तभी तोती की नजर दूसरे पेड़ पर गई वहां दो जवान तोते रहते थे। एक पूजा पाठ में लीन था, तो दूसरा इबादत में।
तोती ने सोचा- ये नेक बंदे हैं इन्हीं लोगों के पास अपनी तोती बिटिया को छोड़ देती हूं।
तोती उन दोनों के पास जाकर- बच्चों मैं तीरथ जा रही हूं एक महीने बाद लौटूंगी, क्या तुम मेरी बेटी का ख्याल रख सकते हो इतने दिन? दोनों - क्यों नहीं आंटी, आप बे-फिक्र रहिए हमारे घोंसले में एक सेपरेट रूम भी है।
तोती- बहुत बढिय़ा तो इसे संभालो मैं चलती हूं अब सुकून से जा पाऊंगी।
इबादत करने वाला तोता, भजन करने वाले से- अमा खां मजा आ गिया अपनी दुआ कुबूल हो गई।
दूसरा- हां भाई भगवान ने मेरी भी सुन ही ली आखिर!