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म्यांमार में एक गड्ढे से मिली 45 हिंदुओं की बॉडी, PHOTOS आईं सामने

4 वर्ष पहले
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इंटरनेशनल डेस्क. हाल ही में म्यांमार की सेना ने मॉन्गदा टाउनशिप के पास स्थित एक गांव से करीब 45 बॉडीज बरामद की है। सेना के अनुसार ये उन हिंदुओं की बॉडीज हैं जिनकी कुछ समय पहले रोहिंग्या आतंकियों ने हत्या कर दी थी। सेना की रिपोर्ट के मुताबिक गांव के अब भी 48 हिंदू लापता हैं और इनकी भी हत्या होने की आशंका है। सेना की वेबसाइट ने किया था दावा...
- म्यांमार सेना प्रमुख की वेबसाइट पर जारी बयान के मुताबिक, ‘रखाइन राज्य में सुरक्षा कर्मियों को 45 हिंदुओं के शव मिले हैं, जिनका एआरएसए आतंकिया द्वारा कत्ल किया गया।’ 
- म्यांमार सेना के अनुसार हजारों हिंदू उन गांवों से भाग चुके हैं, जहां वे रह रहे थे, क्योंकि रोहिंग्या आतंकवादियों द्वारा इन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
- हाल ही में म्यांमार से भागकर बांग्लादेश में रिफ्यूजी बनने वाले हिंदू परिवारों ने भी रोहिंग्या मुसलमानों के आतंकी गुट पर नरसंहार के आरोप लगाए थे।
- न्यूज एजेंसी से बातचीत में एक महिला ने कहा- कम से कम 100 हिंदुओं की हत्या की गई और उनकी लाशों को कीचड़ से भरे गड्ढों में फेंक दिया गया। 
- घटना की चश्मदीद एक महिला ने कहा- मेरे पति, दो भाई और अनगिनत पड़ोसियों की गला रेतकर हत्या कर दी गई। हिंदुओं के गांव में रोहिंग्या आतंकियों ने आग लगा दी थी। 
 
गांवों पर हमले के बाद आर्मी ने लिया एक्शन
- म्यांमार की आर्मी का आरोप है कि 25 अगस्त को रोहिंग्या आतंकी गुट ने एक पुलिस स्टेशन पर हमला किया। कुछ पुलिसवाले भी मारे गए। इसके बाद इन लोगों ने हिंदुओं के गांवों पर हमला कर दिया। इन घटनाओं के बाद म्यांमार की आर्मी ने एक्शन लिया। अब रोहिंग्याओं को यहां से निकाला जा रहा है। 
- म्यांमार से भागे ज्यादातर लोग बांग्लादेश पहुंच रहे हैं क्योंकि, म्यांमार और बांग्लादेश के बीच दूरी काफी कम है। इन लोगों ने म्यांमार की आर्मी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कई संगठन म्यांमार आर्मी की कार्रवाई को ज्यादती बता रहे हैं। 
- दूसरी ओर, म्यांमार आर्मी का कहना है कि उसने सिर्फ उन रोहिंग्याओं के खिलाफ कार्रवाई की है, जो आतंकी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। उसका आरोप है कि ये आतंकी संगठन सिर्फ हिंदुओं और बौद्धों को निशाना बना रहे हैं।
 
कौन हैं रोहिंग्या मुस्लिम
- रोहिंग्या मुस्लिम प्रमुख रूप से म्यांमार के अराकान प्रांत में बसने वाले अल्पसंख्यक हैं। इन्हें सदियों पहले अराकान के मुगल शासकों ने यहां बसाया था।
- वर्ष 1785 में बर्मा के बौद्ध लोगों ने देश के दक्षिणी हिस्से अराकान पर कब्जा कर लिया था। उन्होंने हजारों की संख्या में रोहिंग्या मुस्लिमों को अपने इलाके से बाहर खदेड़ दिया
- इसी के बाद से बौद्ध धर्म के लोगों और रोहिंग्या मुस्लिमों के बीच से हिंसा और कत्लेआम का दौर शुरू हुआ, जो अब तक जारी है।
 

आगे की स्लाइड्स में देखें घटनास्थल की फोटोज...
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