मैसाच्युसेट्स। शरीर पर लगे जख्मों का दर्द तो बर्दाश्त किया जा सकता है, लेकिन मन और दिल पर लगे जख्म बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाता है। अमेरिका की चार्ला नाश ने तो दोनों ही तरह के जख्मों का दर्द झेला है, लेकिन इसके बाद भी जिंदगी से हार नहीं मानी।
पांच साल पहले चिंपांजी ने चार्ला का चेहरा और उसका हाथ बुरी तरह जख्मी कर दिया था। हालत ये हो गई थी कि उनकी आंख, नाक, होंठ और हाथ बुरी तरह घायल हो गए थे, लेकिन चार्ला ने हार नहीं मानी और इन जख्मों से लगातार मुकाबला करती रहीं। तीन साल के पहले हुई चेहरे की ट्रांसप्लांट सर्जरी के बाद अब वो दोबारा हंसना सीख रही हैं।
चार्ला पुराने दिन याद करते हुए कहती हैं कि वो बहुत अकेलापन महसूस करती थीं, लेकिन किसी की परवाह किए बगैर वो आगे बढ़ती रहीं। वो कभी भी हार नहीं मानना चाहती थीं। चार्ला ने बताया कि ज्यादा दिन नहीं हुए, जब वो अमेरिकन केयर होम में रहती थीं तो उनके खराब चेहरे की वजह से कोई भी उनके पास नहीं आना चाहता था। बदकिस्मती ये थी कि वो चाहकर भी कुछ नहीं कर सकती थी।
चार्ला कहती हैं कि उन्होंने अपनी आज़ादी खो दी थी। पहले जहां वो अपनी गाड़ी का टायर भी खुद बदल लेतीं, वहीं अब उनके लिए खुद खाना खाना भी मुश्किल हो गया था। कभी वो रोना चाहतीं तो कभी बाहर घूमने जाना चाहती, लेकिन उनके लिए कुछ भी संभव नहीं था। चार्ला कहती हैं कि उन्हें ये तक नहीं पता था कि उनका भविष्य क्या है।
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