ढाका। बांग्लादेश के चटगांव की एक अदालत ने 2004 में दस ट्रक हथियारों की तस्करी मामले में 14 व्यक्तियों को फांसी की सजा सुनाई। जिन लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई उनमें जमात अमीर मोती उर्रहमान, निजामी, भूतपूर्व गृह राज्य मंत्री लुत्फुज्जमान बाबर तथा उल्फा नेता परेस बरआ शामिल हैं।
चटगांव मेट्रोपालिटन विशेष न्यायाधिकरण के जज एस एम मुजीबुर्रहमान ने फैसले का सारांश साढे बारह बजे पढकर सुनाना शुरू किया। इससे पहले 11 आरोपियों को अदालत में पेश किया गयास जिनमें पूर्व मंत्री मोती उर्रहमान निजामी तथा लतीफुज्जमा बाबर शामिल थे।
जिन अन्य लोगों को अदालत में पेश किया गया उनमें राष्ट्रीय सुरक्षा गुप्तचर सेवा के पूर्व महानिदेशक ब्रिगेडियर जनरल अब्दुर्रहीम और गुप्तचर निदेशालय के निदेशक अवकाश प्राप्त मेजर जनरल रजाकुल हैदर चौधरी शामिल हैं। मेट्रोपालिटन जज ने फैसला कड़ी सुरक्षा के बीच सुनाया।
एक दशक पूर्व बांग्लादेश में तस्करी के जरिए लाए गए हथियारों की यह सबसे बडी बरामदगी थी। यह हथियार भारत के उग्रवादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम के भेजे जाने वाले थे। इस मामले में बांग्लादेश के अधिकारियों तथा उल्फा नेता परेश बरआ सहित 52 आरोपी थे। इस संबंध में दो मामले दर्ज कराए गए थे।
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