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  • 72 साल पहले बंगाल में भयानक अकाल के दौर में 30 लाख लोगों ने जान गंवाई थी
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PHOTOS: बांग्लादेश ने देखा था भुखमरी का ऐसा दौर, चली गईं थी लाखों जानें

Dainik Bhaskar

Jun 04, 2015, 12:10 AM IST

बांग्लादेश ने देखा था अकाल का ऐसा दौर, भूख से तड़पकर गई थीं लाखों जानें

1943 में बंगाल में आए भीषण अकाल के दौरान सड़क के किनारे भूख से तड़पता बच्चा। 1943 में बंगाल में आए भीषण अकाल के दौरान सड़क के किनारे भूख से तड़पता बच्चा।
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इंटरनेशनल डेस्क। 72 साल पहले बंगाल (मौजूदा बांग्लादेश, भारत का पश्चिम बंगाल, बिहार और उड़ीसा) ने अकाल का वो भयानक दौर देखा था, जिसमें करीब 30 लाख लोगों ने भूख से तड़पकर अपनी जान दे दी थी। ये द्वितीय विश्वयुद्ध का दौर था। माना जाता है कि उस वक्त अकाल की वजह अनाज के उत्पादन का घटना था, जबकि बंगाल से लगातार अनाज का निर्यात हो रहा था। हालांकि, विशेषज्ञों के तर्क इससे अलग हैं।
अकाल से ऐसे थे हालात
लेखक मधुश्री मुखर्जी ने उस अकाल से बच निकले कुछ लोगों को खोज उनसे बातचीत के आधार पर अपनी किताब में लिखा है कि उस वक्त हालात ऐसे थे कि लोग भूख से तड़पते अपने बच्चों को नदी में फेंक रहे थे। न जाने ही कितने लोगों ने ट्रेन के सामने कूदकर अपनी जान दे दी थी। लोग पत्तियां और घास खाकर जिंदा थे। लोगों में सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन करने का भी दम नहीं बचा था। इस अकाल से वही लोग बचे जो रोजगार की तलाश में कोलकाता (कलकत्ता) चले आए थे या वे महिलाएं जिन्होंने परिवार को पालने के लिए मजबूरी में वेश्यावृत्ति करनी शुरू कर दी।
प्राकृतिक या मानवजनित त्रासदी
ये सिर्फ कोई प्राकृतिक त्रासदी नहीं थी, बल्कि मानवनिर्मित भी थी। ये सच है कि जनवरी 1943 में आए तूफान ने बंगाल में चावल की फसल को नुकसान पहुंचाया था, लेकिन इसके बावजूद अनाज का उत्पादन घटा नहीं था। इस विषय पर लिखने वाले ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिक और सोशल एक्टिविस्ट डॉ. गिडोन पोल्या का मानना है कि बंगाल का अकाल 'मानवनिर्मित होलोकास्ट' था। इसके पीछे अंग्रेज सरकार की नीतियां जिम्मेदार थीं। इस साल बंगाल में अनाज की पैदावार बहुत अच्छी हुई थी, लेकिन अंग्रेजों ने मुनाफे के लिए भारी मात्रा में अनाज ब्रिटेन भेजना शुरू कर दिया और इसी के चलते बंगाल में अनाज की कमी हुई।
वहीं, जाने-माने अर्थशात्री अमर्त्य सेन का भी मानना है कि 1943 में अनाज के उत्पादन में कोई खास कमी नहीं आई थी, बल्कि 1941 की तुलना में उत्पादन पहले से ज्यादा था। इसके लिए ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल को सबसे ज्यादा जिम्मेदार बताया जाता है, जिन्होंने स्थिति से वाकिफ होने के बाद भी अमेरिका और कनाडा के इमरजेंसी फूड सप्लाई के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। इन्होंने प्रभावित राज्यों की मदद की पेशकश की थी। जानकारों का कहना है कि चर्चिल अगर चाहते तो इस त्रासदी को रोका जा सकता था। वहीं, बर्मा (मौजूदा म्यांमार) पर जापान के आक्रमण को भी इसकी वजह माना जाता है। कहा जाता है कि जापान के हमले के चलते बर्मा से भारत में चावल की सप्लाई बंद हो गई थी।
(नोट- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस हफ्ते बांग्लादेश के दौरे पर जा रहे हैं। इस मौके पर हम बांग्लादेश की खास जगहों, इंडस्ट्री, लाइफस्टाइल और वहां की मशहूर घटनाओं के बारे में अपनी अलग-अलग रिपोर्ट में बता रहे हैं।)
आगे की स्लाइड्स में देखें, बंगाल में अकाल के उस भयानक दौर के PHOTOS...

अकाल से प्रभावित लड़की। अकाल से प्रभावित लड़की।
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अपनी पोती से साथ अनाज के लिए भटकता किसान। अपनी पोती से साथ अनाज के लिए भटकता किसान।
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मेटल वायर से अनाज से भरा डिब्बा खोलने की कोशिश करते बच्चे। मेटल वायर से अनाज से भरा डिब्बा खोलने की कोशिश करते बच्चे।
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लोगों को अनाज बांटते हुए। लोगों को अनाज बांटते हुए।
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लोगों को अनाज बांटते हुए। लोगों को अनाज बांटते हुए।
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लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाते हुए। लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाते हुए।
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अकाल से प्रभावित। अकाल से प्रभावित।
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अकाल से प्रभावित। अकाल से प्रभावित।
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ऑफिस के बाहर भीड़ लगाकर बैठे अकाल प्रभावित। ऑफिस के बाहर भीड़ लगाकर बैठे अकाल प्रभावित।
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राहत कैंप में खाना खाते अकाल प्रभावित। राहत कैंप में खाना खाते अकाल प्रभावित।
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राहत सामग्री लेकर पहुंची ट्रकें। राहत सामग्री लेकर पहुंची ट्रकें।
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अनाज मिलने के इंतजार में बैठे बच्चे। अनाज मिलने के इंतजार में बैठे बच्चे।
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अपने बच्चों को लेकर अन्न के लिए भटकती महिला। अपने बच्चों को लेकर अन्न के लिए भटकती महिला।
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अनाज के लिए लाइन लगाकर खड़े लोग। अनाज के लिए लाइन लगाकर खड़े लोग।
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अनाज के लिए लाइन लगाकर खड़ी औरतें। अनाज के लिए लाइन लगाकर खड़ी औरतें।
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सरकारी राशन की दुकान के बाहर बैठी महिलाएं। सरकारी राशन की दुकान के बाहर बैठी महिलाएं।
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1943 में बंगाल में आए भीषण अकाल के दौरान सड़क के किनारे भूख से तड़पता बच्चा।1943 में बंगाल में आए भीषण अकाल के दौरान सड़क के किनारे भूख से तड़पता बच्चा।
अकाल से प्रभावित लड़की।अकाल से प्रभावित लड़की।
अपनी पोती से साथ अनाज के लिए भटकता किसान।अपनी पोती से साथ अनाज के लिए भटकता किसान।
मेटल वायर से अनाज से भरा डिब्बा खोलने की कोशिश करते बच्चे।मेटल वायर से अनाज से भरा डिब्बा खोलने की कोशिश करते बच्चे।
लोगों को अनाज बांटते हुए।लोगों को अनाज बांटते हुए।
लोगों को अनाज बांटते हुए।लोगों को अनाज बांटते हुए।
लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाते हुए।लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाते हुए।
अकाल से प्रभावित।अकाल से प्रभावित।
अकाल से प्रभावित।अकाल से प्रभावित।
ऑफिस के बाहर भीड़ लगाकर बैठे अकाल प्रभावित।ऑफिस के बाहर भीड़ लगाकर बैठे अकाल प्रभावित।
राहत कैंप में खाना खाते अकाल प्रभावित।राहत कैंप में खाना खाते अकाल प्रभावित।
राहत सामग्री लेकर पहुंची ट्रकें।राहत सामग्री लेकर पहुंची ट्रकें।
अनाज मिलने के इंतजार में बैठे बच्चे।अनाज मिलने के इंतजार में बैठे बच्चे।
अपने बच्चों को लेकर अन्न के लिए भटकती महिला।अपने बच्चों को लेकर अन्न के लिए भटकती महिला।
अनाज के लिए लाइन लगाकर खड़े लोग।अनाज के लिए लाइन लगाकर खड़े लोग।
अनाज के लिए लाइन लगाकर खड़ी औरतें।अनाज के लिए लाइन लगाकर खड़ी औरतें।
सरकारी राशन की दुकान के बाहर बैठी महिलाएं।सरकारी राशन की दुकान के बाहर बैठी महिलाएं।
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