पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Boy Worldwide Search For Bone Marrow Donor

जिंदगी देने वाला बच्चा जिंदगी को मोहताज

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
लंदन. यह कहानी है लंदन के हैरो इलाके में रहने वाले 10 साल के दुष्यंत मेहता की। दुष्यंत दो साल का था जब उसने पहली बार बोन मैरो डोनेशन किया। 7 साल बड़ी बहन दिव्यांशी के लिए। एक दुर्लभ बीमारी की वजह से दिव्यांशी का बोन मैरो फेल हो गया था। दुष्यंत के बोन मैरो डोनेशन से दिव्यांशी को साढ़े पांच साल और जीने का मौका मिला था। अब वही दुष्यंत बोन मैरो की उसी बीमारी से लड़ रहा है। मुश्किल यह है कि दुष्यंत के लिए दुनिया में बोन मैरो डोनर ही नहीं मिल रहा है।
दुष्यंत ने दो बार बहन को दिया था बोन मैरो
वाक्या साल 2007 का है दुष्यंत की बहन दिव्यांशी नौ साल की थी। दुष्यंत दो साल का। दिव्यांशी की तबियत बिगड़ी। पता चला कि वह डायस्केराटोसिस से पीड़ित है। इसकी वजह से बोन मैरो फेल हो जाता है। बचाने का एक ही तरीका है बोन मैरो ट्रांसप्लांट। माता-पिता ने कई बोन मैरो डोनरों से संपर्क किया। लेकिन सफलता नहीं मिली। आखिर में दुष्यंत का बोन मैरो टेस्ट हुआ। जो दिव्यांशी से मैच कर गया। इसके बाद दुष्यंत से बोन मैरो लेकर दिव्यांशी में ट्रांसप्लांट किया गया। ऐसा दो बार हुआ पहली बार 2007 में फिर 2008 में। इसने दिव्यांशी को नई जिंदगी दी। हालांकि साढ़े पांच साल बाद 2012 में फेफड़े फेल होने की वजह से 15 साल की उम्र में वो चल बसी।
भारतीय होने की वजह से दिक्कत
हाल ही में दुष्यंत को सर्दी-जुकाम हुआ। लंबे समय तक इलाज के बाद भी ठीक नहीं हुआ। पता चला कि कभी बहन के लिए देवदूत बना दुष्यंत खुद उसी बीमारी का शिकार है। परिजनों का बोन मैरो मैच नहीं कर रहा है। मां कल्याणी मेहता के मुताबिक दुनिया भर के डोनर रजिस्टर में एक भी शख्स ऐसा नहीं है, जिसके टिश्यू दुष्यंत के बोन मैरो से मैच करते हों। भारतीय मूल का होने की वजह से डोनर मिलना मुश्किल हो रहा है, दरअसल बोन मैरो ट्रांसप्लांट के मामले में डोनर और मरीज का एक ही नस्ल का होना जरूरी है। दुष्यंत को कोई भारतीय या भारतीय मूल का शख्स ही बोन मैरो दे सकता है। कोई और नहीं।