पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

ऑड-इवन नंबर नहीं, यहां बस रूट मैनेजमेंट से सुधरा ट्रांसपोर्ट सिस्टम

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
ब्रिस्बेनदिल्ली सरकार द्वारा शुरू किए गए ऑड-इवन पायलट प्रोजेक्ट के बाद मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों ने इसमें रुचि दिखाई है। पर इस तरीके को अपनाए बिना भी सड़कों पर वाहन कम किए जा सकते हैं और लोगों को सार्वजनिक वाहन प्रणाली के प्रति आकर्षित किया जा सकता है। इसका प्रमाण है ब्रिस्बेन। दूसरी गाड़ियां नहीं चलती...
यहां सुबह और शाम के समय निश्चित अवधि के लिए बस लाइन में अन्य गाड़ियों का प्रवेश बंद रहता है। इससे बसें तेजी से चल पाती हैं। उसे बस रैपिड ट्रांजिट रूट (बीआरटी) की तरह इस्तेमाल में लाया जाता है। पर अलग से किसी तरह का निर्माण सड़क पर नहीं किया जाता है।
कैमरों से पूरे शहर पर नजर रखी जाती है। लोग भी इसका पालन करते हैं। लोगों को समस्या न हो इसके लिए हर रूट पर 15 मिनट पर एक बस आती है। जिन बस रूट की किसी बस में भीड़ होती है उस पर बड़े अक्षरों पर मैसेज लिखा होता है कि क्षमा करें यह बस भरी हुई है। साथ ही उसकी सूचना कंट्रोल रूम तक जाती है और वहां से ऐसे रूट पर ज्यादा बसें कम अंतराल पर चलाई जाती हैं।
हर स्टॉप पर गुजरने वाली हर बस की जानकारी, दो बसों के बीच अंतराल और उसके एक दिन के सभी ट्रिप की जानकारी होती है। इससे यह पता चल जाता है कि कौन से रूट पर दिनभर में कितनी बस आएगी और कितने समय में किस स्टाप से गुजरेगी।
आगे की स्लाइड पर जानिए इस सिस्टम के फायदे...
खबरें और भी हैं...