आज से खुल रहा है PAK का ग्वादर पोर्ट, वेस्ट एशिया-अफ्रीका जा सकेंगे चीनी शिप्स; बलूच नेता बोले- मरते दम तक कॉरिडोर का विरोध करेंगे

6 वर्ष पहले
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इस्लामाबाद. पाकिस्तान का ग्वादर पोर्ट रविवार को खुल गया। यह पोर्ट, चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) का ही हिस्सा है। पोर्ट खुलने के साथ ही चीन के शिप्स की वेस्ट एशिया और अफ्रीका तक आवाजाही शुरू हो गई। इस मौके पर चीन का एक शिप सामान लेकर रवाना हुआ। पोर्ट के इनॉगरेशन के लिए नवाज शरीफ समेत कई पॉलिटिकल और मिलिट्री नेता ग्वादर में मौजूद रहे। पोर्ट खुलने से दूरी 5 हजार किमी तक कम हुई...
- 46 अरब डॉलर वाले चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के वेस्ट रूट से एक्सपोर्ट के लिए चीनी सामानों का पहला जखीरा रविवार को ही ग्वादर पोर्ट पहुंचा। अगले 24 घंटों में एक और जहाज पहुंचने वाला है।
- 3218 किमी लंबे इस कॉरिडोर का पहला फेज दिसंबर तक बन जाएगा। पूरा कॉरिडोर बनने में तीन साल लगेंगे।
- चीन दुनिया में क्रूड ऑयल का सबसे बड़ा इम्पोर्टर है। अभी चीन आने वाला 80% क्रूड ऑयल मलाका खाड़ी से होते हुए शंघाई पहुंचता है।
- करीब 16 हजार किमी का सफर तय करने में जहाजों को 3 माह लगते हैं, लेकिन अब यह दूरी 5 हजार किमी तक घट जाएगी।
बलूच कर रहे कॉरिडोर का विरोध
- बलूच नेता इस कॉरिडोर का विरोध कर रहे हैं।
- एक्टिविस्ट जावद बलूच ने कहा, 'ये बलूचों के खून से बना है। हम इसका विरोध करते रहेंगे।'
- बलूच नेता हम्माल बलोच ने कहा, 'पाक ने कितने मासूम बलूचों को मौत के घाट उतार दिया। हम विरोध करेंगे क्योंकि ये जिंदगी और मौत का सवाल है।'
नवाज बोले- फॉरेन इन्वेस्टर्स को मिलेगी पूरी सुरक्षा
- पीएम नवाज शरीफ ने कहा- 'ग्वादर पोर्ट का इस्तेमाल करने वाले फॉरेन इन्वेस्टर्स को पूरी सुरक्षा दी जाएगी। नए ट्रेड रूट्स और पोर्ट पर पाक आर्मी ने सुरक्षा के लिहाज से स्पेशल फोर्स की तैनाती की है।'
कहां है ग्वादर?
- बलूचिस्तान में स्थित ग्वादर अरब सागर तट पर स्थित है।
- ग्वादर पोर्ट की लोकेशन स्ट्रैटजिकली साउथ-सेंट्रल एशिया और पश्चिम एशिया को जोड़ती है।
- इसके अलावा ग्वादर, फारस की खाड़ी के मुहाने पर भी स्थित है जो इसे अरब देशों से जोड़ने में कारगर है।
चीन के लिए क्यों है फायदेमंद?
- चीन अरब सागर और हिंद महासागर में पैठ बनाना चाहता है।
- ग्वादर के जरिए चीनी शिप्स को मलक्का की खाड़ी (मलय पेनिनसुला और इंडोनेशिया) में भी एंट्री मिल सकेगी।
क्या है CPEC?
- बलूचिस्तान के ग्वादर से चीन के शिनजियांग तक 46 बिलियन डॉलर का इकोनॉमिक कॉरिडोर बनाया जा रहा है।
- CPEC का पहला फेज इस साल दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद है। 3 साल में यह पूरा बनकर तैयार हो जाएगा।
- पाक आरोप लगाता रहा है कि भारत कॉरिडोर के बनने में मुश्किलें खड़ी कर रहा है।
- राहिल शरीफ ने पिछले दिनों कहा था, "भारत इस डेवलपमेंट के लिए सबसे बड़ा चैलेंज है। रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) इस पर नजर रख रखी है।
चीन की आर्मी होगी तैनात
- चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) इस कॉरिडोर के तहत आने वाले काराकोरम हाईवे की सिक्युरिटी के लिए तैनात की जाएगी।
- फिलहाल, पाकिस्तान ने 3 इंडिपेंडेंट इन्फैंट्री ब्रिगेड और 2 रेजिमेंट्स को इस हाईवे की सिक्युरिटी के लिए तैनात किया है। एक ब्रिगेड में कम से कम 3 रेजीमेंट होती हैं। हर रेजीमेंट में एक हजार जवान होते हैं।
- मकरान कोस्ट से होते हुए ये कॉरिडोर लाहौर और इस्लामाबाद को जोड़ेगा। गिलगित-बाल्तिस्तान (पीओके) होते हुए यह काराकोरम हाईवे को भी जोड़ेगा।
- इसके चलते चीन को इंडियन ओशन और उसके आगे तक सीधा रास्ता मिल जाएगा।
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