(अमेरिका का युद्धपोत यूएसएस जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश सीवीएन-77)
इंटरनेशनल डेस्क। तकनीकी क्षेत्र में तरक्की ने दुनिया को बेमिसाल पुलों से लेकर आलीशान इमारतों तक बहुत कुछ दिया है। आज के वक्त में गगनचुंबी इमारतें दुनिया के किसी भी कोने में देखी जा सकती हैं। तकनीकी विकास और आधुनिक मशीनरी के चलते अब ऊंची इमारतों, जहाजों से लेकर अंडरवाटर बिल्डिंग बनाना आसान हो गया है। वर्ल्ड इंजीनियर्स डे के मौके पर यहां हम दुनिया की कुछ ऐसे ही स्ट्रक्चर्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जो इंजीनियरिंग के बेजोड़ नमूनों में गिने जाते हैं। वर्ल्ड इंजीनियर्स डे भारत के मशहूर इंजीनियर भारत रत्न एम विश्ववरैया की याद में उनके जन्मदिन पर हर साल 15 सितंबर को मनाया जाता है। आगे देखिए इंजीनियरिंग के 10 बेजोड़ नमूने...
यूएसएस जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश (सीवीएन-77), अमेरिका
यूएसएस जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश का निर्माण 2001 में नार्थरोप ग्रूमैन न्यूपोर्ट न्यूज शिपयार्ड में शुरू हुआ और 2009 में पूरा हुआ। इसके निर्माण में 377 करोड़ रुपए की लागत आई। निर्माण के बाद इसे वर्जीनिया के नेवी स्टेशन नॉरफ्लॉक लाया गया। 1092 फीट के फैलाव और 1000,000 टन के विस्थापन वाला ये पोत दुनिया के सबसे बड़े युद्धपोतों में से एक है। बाकी युद्धपोतों से ये तकनीक के मामले में काफी आगे है। इसमें आधुनिकतम टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हुआ है, जिसे इससे पहले कभी नहीं इस्तेमाल किया गया। ये दो न्यूक्लियर रिएक्टर से संचालित होता है। इसे 20 साल से ज्यादा वक्त तक बिना ईंधन भरवाए इस्तेमाल किया जा सकता है।
आगे देखिए: इंजीनियरिंग के 9 और बेजोड़ नमूने...