(नदी पर पुल बनाते रूसी सैनिक।)
इंटरनेशनल डेस्क। सैकड़ों बरसों से इस्तेमाल किया जा रहा पॉन्टून ब्रिज (तैरने वाले पुल) सेना की अहम जरूरतों में से है। गैरीग्लिआनो के युद्ध से लेकर 1973 के अरब-
इजरायल समेत तमाम युद्धों में कामयाबी दिलाने में इन पुलों ने बड़ी भूमिका निभाई। इसके साथ ही, ये बुरे हालात में रेस्क्यू के लिए भी इस्तेमाल में लाए जाते हैं। ऐसे पुलों का इस्तेमाल कुछ समय के लिए किया जाता है। युद्धों में कई बार सेना इन्हें इस्तेमाल करने के बाद नष्ट कर देती है, ताकि दुश्मनों को इसका फायदा नहीं मिल सके।
सेना के इंजीनियर नदी के एक किनारे से दूसरे किनारे तक जाने के लिए बेहद कम समय में इस ब्रिज का निर्माण कर देते हैं। इसके जरिए पैदल चलने वालों के अलावा आसानी से गाड़ियां और टैंक भी जा सकते हैं। यहां हम तस्वीरें के जरिए ये दिखाने जा रहे हैं कि इन पुलों का निर्माण किस तरह से किया जाता है।
कब हुई ऐसे ब्रिज की शुरुआत
पॉन्टून ब्रिज यानी तैरने वाले ब्रिज का सबसे पहले निर्माण 480 ईसा पूर्व एक पारसी ने किया था। इसका निर्माण हेलेसपॉन्ट पर हमला करने वाले जैक्सीस की सेना के परिवहन के लिए किया गया था। ग्रीक इतिहासकार हेरोडोटस के अनुसार, इस ब्रिज का निर्माण 676 जहाजों को बराबर लाइन में खड़ा कर किया गया था। समय-समय पर ऐसे ब्रिज अलग-अलग सामानों के जरिए बनाए गए।
आगे देखिए: रूसी सेनाओं द्वारा बनाए जा रहे पॉन्टून ब्रिज की तस्वीरें...