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पूर्व ब्रिटिश पीएम कैमरन का सांसद पद से इस्तीफा, कहा- बैकबेंचर बनकर नहीं बैठ सकता

5 वर्ष पहले
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लंदन. पूर्व ब्रिटिश पीएम डेविड कैमरन ने सांसद पोस्ट से भी इस्तीफा दे दिया है। सोमवार को दिए इस्तीफे में उन्होंने लिखा कि वे तुरंत प्रभाव से सांसद पद से हटना चाहते हैं। कैमरन ने कहा, "हाउस में बैकबेंचर बनकर रहना काफी मुश्किल है। मैं नहीं चाहता कि मौजूदा पीएम थेरेसा मे से किसी बात को लेकर मतभेद हो।" बता दें कि 23 मई को ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन (ईयू) से अलग होने (ब्रैग्जिट) के बाद कैमरन ने 24 जून को पीएम की पोस्ट से इस्तीफा दे दिया था। कैमरन ब्रिटेन के ईयू में बने रहने के पक्ष में थे। 2001 से थे सांसद, 6 साल पीएम रहे...
- कैमरन 2001 से ऑक्सफोर्डशायर के विटनी से सांसद थे। 2005 में वे कंजरवेटिव पार्टी के लीडर बने। 2010 में कैमरन ब्रिटेन के पीएम बने थे।
- पहले उन्होंने कहा था कि वे मे की लीडरशिप में सांसद बने रहेंगे।
- सोमवार को उन्होंने कहा कि वे मतभेदों को दूर रखने के लिए सांसद पद छोड़ रहे हैं।

क्या बोले कैमरन?
- "मैं अपनी पोजिशन को लेकर पिछले कई दिनों से सोच रहा हूं। इसी के बाद मैंने सांसद पोस्ट से भी इस्तीफा देने का फैसला किया है।"
- "जाहिर है कि मेरे इस्तीफा देने के बाद विटनी में बाइ-इलेक्शन होगा। मैं वहां कंजरवेटिव पार्टी के कैंडिडेट को जिताने में मदद करूंगा।"
- "पीएम पोस्ट से इस्तीफा देने और पॉलिटिक्स की कठिनाइयों के चलते मेरे लिए हाउस में बैकबेंचर बनकर बैठना तकलीफदेह हो रहा था।"
- "हालांकि, मैं थेरेसा मे को सपोर्ट करता रहूंगा और उनकी लीडरशिप में काम करता रहूंगा।"
- वैसे, अभी ये तय नहीं है कि आगे आने वाले वक्त में कैमरन की भूमिका क्या होगी। माना जा रहा है कि पब्लिक लाइफ में वे कंजरवेटिव पार्टी के लिए काम करते रहेंगे।
क्यों पड़ी रेफरेंडम की जरूरत
- बता दें कि यूके (यूनाइटेड किंगडम) को ही ग्रेट ब्रिटेन या ब्रिटेन कहा जाता है। इसमें इंग्लैंड, वेल्स, स्कॉटलैंड और ईस्ट आयरलैंड शामिल हैं।
- यूके में लंबे समय से यह दलीलें दी जा रही थीं कि यूनियन में शामिल होने की वजह से देश अपनी इकोनॉमी या फॉरेन पॉलिसी को लेकर आजादी से फैसले नहीं कर पा रहा है। उसकी डेमोक्रेसी पर असर पड़ रहा है।
- यह कहा गया था कि ईयू से अलग होने पर यूके इमिग्रेशन पॉलिसी को लेकर भी खुद फैसले कर पाएगा।
- पिछले इलेक्शन के बाद जब डेविड कैमरन पीएम बने तो उन्होंने वादा किया था कि वे रेफरेंडम कराएंगे।
क्या आए नतीजे?
- रेफरेंडम के आए नतीजों में 52 फीसदी ने ईयू छोड़ने, जबकि 48 फीसदी ने इसमें बने रहने के फेवर में वोट किए।
- यूथ चाहते थे EU में ही रहे UK, लेकिन बुजुर्गों की एकतरफा वोटिंग ने देश को अलग करने का फैसला दिया।
- 13 लाख वोटों के चलते यस और नो के बीच 4% वोटों का अंतर पैदा हुआ।
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