केयर्न। आर्थिक रूप से विकसित और विकासशील देशों के संगठन जी 20 की बैठक में इस बार आर्थिक मोर्चे पर भारत को काले धन के खिलाफ जारी अपनी मुहिम में बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। बैठक में भाग लेने आए जी 20 देशों के वित्त मंत्रियों और केन्द्रीय बैकों के अध्यक्षों ने लंबी चली बहस के बाद इस बात पर सहमति जताई कि वे एक दूसरे के यहां गुप्त बैंक खातों के बारे जानकारी साझा करने और दोहरी कराधान बचाव संधि की आड़ में सीमापार कर चोरी को रोकने के लिए एक पुख्ता प्रणाली विकसित करेंगे।
बैठक के बाद आज जारी घोषणा पत्र में सदस्य देशों ने इसके लिए संकल्प लेते हुए कहा कि आर्थिक विकास के लिए बेहतर कराधान व्यवस्था समय की जरूरत बन चुकी है। इसके लिए सभी मिलकर कर चोरी और बैंक खातों की गुप्त जानकारी साझा करने के लिए एक स्वचालित सूचना प्रणाली विकसित करेंगे। इसे वर्ष 2015 में अंतिम रूप दे दिया जाएगा, जिसके बाद साल 2017 के अंत तक गुप्त बैंक खातों और कर चोरी के मामलों की जानकारी हासिल करना संभव हो जाएगा।
नई व्यवस्था के फायदे
गुप्त बैंक खातों के खिलाफ जोरदार अंतर्राष्ट्रीय अभियान चलाने वाली संस्था ओईसीडी के अध्यक्ष पास्कल सेंट अमन ने इस पर सटीक टिप्पणी करते हुए कहा कि नई व्यवस्था के आते ही बैंकों में जानकारी गुप्त रखने का दौर इस दुनिया से हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। भारत में विदेशी निवेश के नाम पर सबसे ज्यादा काला धान मॉरीशस के रास्ते आने की बात कही जाती है, क्योंकि मॉरीशस और भारत के बीच दोहरी कराधान बचाव संधि की व्यवस्थाओं के तहत निवेशकों को भारत में कर अदायगी से छूट मिल जाती है। इसके कारण अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
दूसरा ऐसा भी दावा किया जाता है कि जी 20 देशों ने काले धन और कर चोरी की जानकारी साझा करने के लिए जिस नई प्रणाली को विकसित करने का संकल्प लिया है, उसमें सिर्फ गुप्त बैंक खातों में जमा धन की ही जानकारी हासिल नहीं की जा सकेगी, बल्कि इसके जरिए इन खातों में मिलने वाले ब्याज, लाभांश, और शेष राशि के बारे में सारी जानकारी मिल सकेगी।
दुनिया की आर्थिक स्थिति दुरुस्त नहीं
इसके साथ ही दुनिया के विकसित और विकासशील देशों ने स्वीकार किया है कि नीतिगत स्तर पर की गई तमाम कोशिशों के बावजूद दुनिया की आर्थिक सेहत अभी तक दुरूस्त नहीं हो सकी है। आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी है। लिहाजा, इसे गति देने के लिए तत्काल एकजुट प्रयास की दरकार है।सदस्य देशों ने माना कि सिडनी घोषणापत्र में किए गए संकल्प पर अमल करना होगा, जिसमें साल 2018 तक जी 20 देशों की अर्थव्यवस्थाओं की सकल विकास दर को दो प्रतिशत से ऊपर ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है।
(ऑस्ट्रेलिया के केयर्न में जी-20 देशों की बैठक)