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पाक में हिंदू लेखक के हत्यारे को सम्मानित करने की मांग

9 वर्ष पहले
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लाहौर। पाकिस्तान में हिंदू लेखक राजपाल की हत्या का मामला 84 साल बाद अब खुलेगा। इसलिए नहीं कि उनकी हत्या में किसी को सजा नहीं मिली या कोई निर्दोष सजा पा गया। वह इसलिए खुलेगा क्योंकि हत्या करने वाले ने लेखक को ईशनिंदा का दोषी मानते हुए मारा था।

अब उसे हत्या के आरोप से बरी करते हुए सम्मानित किए जाने की मांग की जा रही है। लाहौर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस उमर अता बांदियाल ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई की। अगली सुनवाई 14 मार्च को होगी। लाहौर हाईकोर्ट ने ही 1929 में राजपाल की हत्या के आरोप में गाजी इलामुद्दीन को फांसी की सजा सुनाई थी।

अब ‘सेव द ज्युडिशियरी कमेटी’ के इम्तियाज रशीद ने कोर्ट में याचिका दाखिल की है। उसके वकील ने कहा कि ‘राजपाल की किताबों में कई जगह ईशनिंदा है। उसने खुद अपनी मौत बुलाई थी।’ गाजी इलामुद्दीन को राजपाल से कोई निजी दुश्मनी नहीं थी। उसने पैगंबर से सच्चे प्यार की खातिर हत्या की थी। याचिका में कोर्ट से यह मांग भी की गई है कि वह इलामुद्दीन को ‘निर्दोष करार’ होने के बाद राजकीय सम्मान से दफनाने और सम्मानित करने के निर्देश दे।