न्यूयॉर्क/वॉशिंगटन। हाईटेक साइबर चोरों ने कुछ ही घंटों में 27 देशों के हजारों एटीएम से 4.5 करोड़ डॉलर (करीब 250 करोड़ रुपए) चुरा लिए। हैकर्स ने पहले पेमेंट प्रोसेसिंग कंपनियों के कंप्यूटर सिस्टम हैक किए। फिर मैग्नेटिक काड्र्स के जरिए एक साथ कई देशों में एटीएम से पैसे निकाल लिए।
अमेरिका में सरकारी वकील ने गुरुवार को ब्रुकलिन में आठ लोगों को आरोपी बनाया है। इनमें वह
संदिग्ध ग्रुप लीडर भी है जिसे डोमिनिकन रिपब्लिक में 27 अप्रैल को मरा हुआ पाया गया था। अमेरिकी अटॉर्नी लॉरेटा लिंच ने कहा, ‘न्यूयॉर्क सिटी के इतिहास में यह
सबसे बड़ी चोरियों में से एक है। बंदूकों और नकाबों की जगह इस साइबर क्राइम ऑर्गेनाइजेशन ने लैपटॉप्स और इंटरनेट का इस्तेमाल किया है।’
महंगी कारों को खरीदने पर खर्च हुआ पैसा : न्यूयॉर्क में पैसे निकालने वाले लोगों का लीडर 23 साल का अलबर्टो था। उसकी लाश पिछले महीने डोमिनिकन रिपब्लिक में मिली थी। सात और लोगों पर एक्सेस डिवाइस फ्रॉड और मनी लॉन्डरिंग के आरोप लगाए गए हैं। उन्हें 10 साल तक की सजा हो सकती है। इन लोगों ने चोरी का पैसा रोलेक्स घडिय़ां और महंगी कारों जैसे लग्जरी आइटम्स खरीदने पर खर्च किया।
भारतीय आउटसोर्सिंग कंपनियां संदेह के घेरे में : एक साल के अंदर साइबर धोखाधड़ी का यह चौथा मामला है। इसमें भारतीय कंपनियों के कामकाज पर संदेह जताया गया है।
वैश्विक नियामक या प्रवर्तन एजेंसियों के अनुसार भारत में संदेहास्पद लेन-देनों रोकने के प्रभावी इंतजाम नहीं है। दुनिया की बड़ी बैंकिंग कंपनियों में से एक यूबीएस को भी एक ठग ने 2.3 अरब डॉलर का नुकसान पहुंचाया था। पिछले साल ब्रिटिश और स्विस नियामकों की
संयुक्त जांच में यह बात
उजागर हुई थी।
हैकर्स ने भारतीय पेमेंट प्रोसेसिंग कंपनी के सिस्टम हैक किए। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात के नेशनल बैंक रास अल-खैयाम के पांच अकाउंट्स की विद्ड्राल लिमिट बढ़ाई। फिर इन बैंक खातों की जानकारी 20 देशों में फैले अपने नेटवर्क को दी। 21 दिसंबर को दुनियाभर के 4500 एटीएम ट्रांजेक्शन से करीब 30 करोड़ रुपए चुरा लिए।
हैकर्स ने इस बार अमेरिकी पेमेंट प्रोसेसिंग कंपनी के सिस्टम हैक किए। ओमान में बैंक ऑफ मस्कट के 12 अकाउंट से जारी कार्ड्स की लिमिट बढ़ाई। 19-20 फरवरी 2013 को करीब 10 घंटे में 36 हजार ट्रांजेक्शन से करीब 220 करोड़ रुपए चुरा लिए।
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