तेहरान। ईरान ने इस्लामी स्टेट के खिलाफ सहयोग का अमेरिकी प्रस्ताव ठुकरा दिया है। ईरान के सबसे बड़े धर्मगुरु अयातोल्लाह अली खमेनी ने सोमवार को यह स्पष्ट किया। ईरान में खमेनी का आदेश अंतिम माना जाता है।
खमेनी ने कहा, 'अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी ने ईरानी विदेश मंत्री मुहम्मद जवद जरीफ से सहयोग मांगा था। जरीफ ने साफ मना कर दिया था। अमेरिका के हाथ गंदे हैं। वह
इराक और सीरिया में भी वैसे ही बिना अधिकार हमले करना चाहता है जैसे वह पाकिस्तान में कर रहा है।' उधर, कैरी ने रविवार को कहा कि अमेरिका को ईरान के सहयोग की जरूरत नहीं है क्योंकि 10 अरब देश अमेरिका के साथ हैं।
अमेरिका ने इस्लामी स्टेट के खिलाफ कार्रवाई पर विचार के लिए ईरान और सीरिया को नहीं बुलाया था। ईरान सीरिया के तीन साल के गृहयुद्ध में सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद के साथ था। जबकि अमेरिका वहां के विद्रोहियों की मदद कर रहा था।
अमेरिका अपने युवाओं को रोकने में जुटा
इसबीच, अमेरिका ने अपने देश से इस्लामी स्टेट के लिए लड़ने
इराक और सीरिया जा रहे युवाओं को रोकने की योजना बनाई है। एटॉर्नी जनरल एरिक होल्डर ने बताया कि इसके लिए व्हाइट हाउस, कानून विभाग और अन्य एजेंसियां सक्रिय हैं। वे विभिन्न समुदायों के नेताओं के संपर्क में हैं। अमेरिकी अफसरों का मानना है कि सीरिया में इस्लामी स्टेट के आतंकियों का साथ 15,000 विदेशी दे रहे हैं। इनमें 100 अमेरिकी हैं।
फ्रांस ने शुरू की जासूसी : फ्रांसने भी ब्रिटेन के साथ मिल कर इस्लामी स्टेट के आतंकियों को खोजने के लिए सीरिया और इराक में जासूसी शुरू कर दी है। इससे अमेरिकी विमानों को उन्हें मार गिराने में मदद मिलेगी। यह जानकारी संयुक्त अरब अमीरात के अल धाफ्रा एयर बेस पर फ्रांस के रक्षा मंत्री ज्यां वेस ले द्रयां ने सोमवार को दी। ऑस्ट्रेलिया ने 600 सैनिक और 10 लड़ाकू विमान देने की घोषणा की है।