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बांग्लादेश में कट्टरपंथियों के खिलाफ खड़े हुए युवा

9 वर्ष पहले
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ढाका. बांग्लादेश की राजधानी में शाहबाग चौक पर अचानक नजारा बदल गया है। पहले यहां सरकार विरोधी नारे लग रहे थे। अब आतंकियों और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के विरोध में आवाज बुलंद हो रही है।
असल में पांच फरवरी को कोर्ट ने एक कट्टरपंथी अब्दुल कादिर मोल्ला को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उसके संगठन जमात-ए-इस्लामी के समर्थक इस फैसले के विरोध में सड़कों पर उतर आए थे। वे सरकार विरोधी नारे लगा रहे थे। उन्हें समर्थन भी मिला। लेकिन अब रुख पलट गया है।
युवा सड़कों पर हैं, लेकिन नारे लगा रहे हैं, ‘देशद्रोहियों को दफना दो’ ‘हमें लोकतंत्र चाहिए’ ‘आईएसआई को कुचल दो।’ बांग्लादेश में एक बार फिर 1971 जैसा माहौल है। इसने विपक्षी नेता खालिदा जिया के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। हालांकि इससे पहले इस्लामी कट्टरपंथियों के खिलाफ आवाज उठाना मुश्किल था।
लेकिन अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) से मोल्ला को मिली सजा और उसके समर्थन में हिंसा ने हालात बदल दिए। मोल्ला 2001 से 2006 के बीच देश में मंत्री रहे थे।