सऊदी अरब के नए शाह सलमान की कुल निजी संपत्ति महज 120 करोड़ सऊदी रियाल (करीब 1974 करोड़) है। यानी अपने पूर्ववर्ती किंग अब्दुल्ला की कुल दौलत (21 बिलियन डॉलर, करीब 1.3 लाख करोड़) की तुलना में दो फीसदी से भी कम। इसकी वजह यह है कि किंग सलमान ने सातवें दशक में विभिन्न कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी को बेटों के सुपुर्द कर दिया था।
हालांकि अब किंग सलमान उस शाही परिवार के प्रमुख हैं, जिसकी कुल संपत्ति करीब 1.4 ट्रिलियन डॉलर (करीब 86 लाख करोड़) है। यह भारत की कुल जीडीपी 2 ट्रिलियन डॉलर (123 लाख करोड़) के 70 फीसदी के बराबर है। इस शाही परिवार के तीन सदस्य अल-वालिद बिन तलाल (20 बिलियन डॉलर), सुल्तान बिन अल अजीज (10 बिलियन डॉलर) और खालिद बिन सुल्तान (2 बिलियन डॉलर) दुनिया के अरबपतियों में शुमार हैं। सलमान के बारे में यह तथ्य भी प्रचारित किया गया कि किंग सलमान कभी किसी कंपनी के शेयर होल्डर नहीं रहे। इसके विपरीत जेएनयू के पूर्व स्कॉलर शरफ सबरी की किताब ‘द हाउस ऑफ सऊद इन कॉमर्स: अ स्टडी ऑन रॉयल आंत्रप्रेन्योरशिप इन सऊदी अरेबिया’ के अनुसार, सातवें दशक तक सलमान जनरल मोटर सऊदी अरब, मेरीटाइम ट्रांसपोर्ट कंपनी समेत दर्जनों कंपनियों में साझेदार थे। बाद में ये कंपनियां या तो बंद हो गईं या इनकी हिस्सेदारी किंग सलमान ने बेटों में बांट दी।
तेल उद्योग पर सलमान के बेटों का कब्जा
किंग सलमान के बेटों की संपत्ति भी काफी ज्यादा है। वे कई कंपनियों में शेयर होल्डर हैं और सऊदी अरब की संपत्ति के प्रमुख स्रोत तेल कारोबार में भी उनकी बड़ी हिस्सेदारी है। किंग सलमान के बेटे प्रिंस फैसल को 2004 में सऊदी अरब का साल का सर्वश्रेष्ठ बिजनेसमैन अवार्ड दिया गया था। सलमान के अन्य बेटे- वर्तमान डिफेंस मिनिस्टर मोहम्मद बिन सलमान, सऊदी रिसर्च एंड मार्केटिंग ग्रुप (एसआरएमजी) के चैयरमैन प्रिंस तुर्की, डिप्टी ऑयल मिनिस्टर प्रिंस अब्दुल अजीज और टूरिज्म अथॉरिटी के प्रमुख प्रिंस सुल्तान - भी कई कंपनियों में हिस्सेदार हैं।
विभिन्न अखबार और पत्रिकाएं प्रकाशित करने वाले एसआरएमजी पर सलमान के तीन बेटों का कब्जा है। लंदन स्थित दैनिक अशरक़ अल अवसात एसआरएमजी समूह ही प्रकाशित करता है। विभिन्न कंपनियों में सलमान के बेटों की हिस्सेदारी 10 से 60 फीसदी तक है।
शाही परिवार के सबसे वरिष्ठ सदस्य होने के नाते किंग सलमान को प्रतिमाह 2 लाख 70 हजार डॉलर (1.6 करोड़) वेतन मिलता है। वर्ष 2000 में शाही परिवार के घरेलू मुद्दों को सुलझाने के लिए बनाई गई फैमिली काउंसिल के प्रमुख बनाए गए सलमान ने सातवें दशक के बाद अपने कारोबारी हित कम कर दिए। इसके बाद उन्होंने आर्थिक संपदा हासिल करने के बजाय दुनिया के ताकतवर नेताओं के साथ करीबी रिश्ते कायम रखने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई। रियाद के गवर्नर के रूप में उन्होंने अपने विदेशी दोस्तों की संख्या में खासा इजाफा किया। वे अपनी दरियादिली के लिए भी जाने जाते हैं। सुल्तान बनते ही पानी, बिजली के लिए सब्सिडी और कर्मचारियों के लिए बोनस की घोषणाएं करके उन्होंने यह जता भी दिया। इस तरह सलमान ने जहां खुद राजनीतिक ताकत और सामाजिक रुतबे पर अपनी पकड़ बनाई, वहीं अपने बेटों को आर्थिक ताकत हासिल करने में मदद की।
शाही परिवार के कारोबारी हित
सऊदी अरब की ज्यादातर बड़ी कंपनियों में शाही सदस्यों की हिस्सेदारी है। फोर्ब्स की "अरब देशों की 500 बड़ी कंपनियों की सूची' में शामिल सऊदी अरब की 113 कंपनियों में से 70 से ज्यादा कंपनियों में शाही परिवार के सदस्यों की हिस्सेदारी है। ये कंपनियां मुख्य रूप से पेट्रोकैमिकल, टेलीकॉम, एनर्जी, बैंकिंग, फूड इंडस्ट्री, इंवेस्टमेंट, रियल स्टेट, होटल एंड टूरिज्म आदि व्यवसायों से जुड़ी हैं। सऊदी अरब के शेयर बाजार “तदावुल” में लिस्टेड 169 कंपनियों में से ज्यादातर के वरिष्ठ पदों पर शाही परिवार के ही सदस्य हैं। इनमें शाही परिवार की तीसरी और चौथी पीढ़ी के सदस्य भी शामिल हैं। सऊदी अरब के ज्यादातर उद्योगपति किसी शाही सदस्य को अपना हिस्सेदार बनाना पसंद करते हैं। वैसे भी शाही परिवार के व्यावसायिक हितों को नजरअंदाज कर सऊदी अरब में कारोबार कर पाना नामुमकिन है।
शाही खून बड़े पद की एकमात्र शर्त
वैसे भी सऊदी अरब में सर्वोच्च सरकारी पद को संभालने की एकमात्र शर्त है शाही परिवार का सदस्य होना। इस तरह सऊदी अरब की पूरी आर्थिक और राजनीतिक ताकत शाही खानदान के पास ही है। शाही परिवार के कुल सदस्यों की संख्या करीब 15 हजार से ज्यादा है लेकिन इनमें से भी महज 2000 पुरुष सदस्य ही देश की सत्ता और आर्थिक गतिविधियों का केंद्र हैं।