(फ्रांसीसी राफेल विमानों द्वारा खींची गई हमले की तस्वीर)
पेरिस/बगदाद। इराक में फैले आतंक के खात्मे के लिए फ्रांस और अमेरिका एकजुट हो गए हैं। फ्रांस के फाइटर जेट्स ने शुक्रवार को इस्लामिक स्टेट ठिकानों पर बम बरसाए।
सद्दाम हुसैन के खिलाफ अमेरिका द्वारा छेड़ी गई जंग के एक दशक बाद फ्रांस, एक बार फिर से अमेरिकी अभियान में शामिल हुआ है। दो फ्रांसीसी राफेल लड़ाकू विमानों ने मोसुल के उत्तर में स्थित इस्लामिक स्टेट के तेल व हथियार डिपो पर चार लेजर बम दागे। फ्रांसीसी विमानों ने संयुक्त अरब अमीरात से उड़ान भरी थी।
इराकी सेना के प्रवक्ता ने बताया कि इस हमले में दर्जनों आतंकी मारे गए हैं। वहीं, एक फ्रांसीसी सैन्य अधिकारी ने आतंकियों को हुए नुकसान की पूरी जानकारी अभी नहीं मिल पाई है। फ्रांसीसी सैन्य अधिकारी ने हमले की एरियल तस्वीरें भी पत्रकारों के साथ शेयर की।
युद्ध मामलों के एक विश्लेषक के अनुसार, फ्रांस का यह हमला सांकेतिक था। इस क्षेत्र में फ्रांसीसी सेना का दखल सीमित होगा। हालांकि, फ्रांस के इस कदम से दूसरे देशों पर इसमें शामिल होने का दबाव बढ़ेगा।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में फ्रांस के विदेश मंत्री लॉरेंट फेबिअस ने बताया, "हम उनका सामना कर रहे हैं जो निर्दोषों का गला काट रहे हैं। वे महिलाओं का रेप कर रहे हैं और लोगों को सूली पर चढ़ा रहे हैं। वो हिंसा का हर तरीका अपना रहे हैं। उनका उद्देश्य है कि पूरी दुनिया में उनकी हिंसक नीतियां लागू हों और उनका साम्राज्य बढ़े।"