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  • मलाला और कैलाश सत्यार्थी को मिला नोबल पुरस्कार

NOBLE: भाषण के पन्ने गायब गायब होने के बावजूद सत्यार्थी ने दी शानदार स्पीच, पढ़ें

7 वर्ष पहले
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फोटो: पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई और भारत के कैलाश सत्यार्थी को बुधवार को नोबेल पुरस्कार दिया गया।
ओस्लो: भारत के चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा की दिशा में काम करने वाली मलाला यूसुफजई को बुधवार को नोबल पुरस्कार दिया गया। नॉर्वे के शहर ओस्लो में आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय सरोद वादक उस्ताद अमजद अली खान ने अपने बेटे अमान और अयान के साथ कार्यक्रम पेश किया। इससे पहले, पाकिस्तानी सिंगर राहत फतेह अली खान ने भी कव्वाली पेश की। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट करके सत्यार्थी को बधाई दी।
स्पीच का पेज हुआ गायब, लेकिन दिया शानदार भाषण
कैलाश सत्यार्थी ने कार्यक्रम में शानदार स्पीच दी। उन्होंने मलाला को अपनी बेटी बताया। इसके अलावा, उन्होंने अपनी जिंदगी से जुड़ी कई कहानियां सुनाईं। कैलाश ने पहले हिंदी और बाद में अंग्रेजी में भाषण दिया। कैलाश अपनी स्पीच के दौरान एक जगह ठिठक गए। उन्होंने बताया कि उनके भाषण के पन्ने गायब हो गए हैं। उन्होंने कहा, ''मुझे नहीं पता कि ऐसा पहले भी कभी हुआ है कि नहीं। मुझे लगता है कि मैंने अपने भाषण का पन्ना खो दिया। लेकिन कोई बात नहीं, मैं ऐसे ही बोलूंगा।''
पढ़ें: उनके भाषण के प्रमुख बिंदु
-मैं आज समस्त राष्ट्र का, धरती मां का विनम्रता से नमन करता हूं।
-मैं आज बच्चों का स्मरण करता हूं, जिनकी मुक्ति की पहली मुस्कुराहट में मैंने उनके चेहरे पर ईश्वर को मुस्कुराते देखा है। मैं मलाला युसूफजई को इस सम्मान के लिए बधाई देता हूं।
-मेरा जिंदगी में सिर्फ एक मकसद है कि हर बच्चा पूरी तरह आजाद हो। बड़ा होने के लिए आजाद हो, खुलकर हंसने और रोने के लिए आजाद हो, स्कूल जाने और सपने देखने के लिए आजाद हो। बच्चों के सपनों को खारिज करने से बड़ी कोई हिंसा नहीं है।
-मैं नहीं मानता कि दुनिया इतनी गरीब है। दुनिया भर की सेनाओं पर एक हफ्ते में होने वाला खर्च हमारे सभी बच्चों को क्लासरूम दिला सकता है।
-मैं यह नहीं मानता है कि हमारे मंदिरों, मस्जिदों, चर्चों और अन्य प्रार्थना गृहों में हमारे बच्चों के सपनों के लिए जगह नहीं है।
-मैं नहीं मानता कि कानून, संविधान, जज और पुलिस हमारे बच्चों को सुरक्षित नहीं कर सकते।
-मैं नहीं मानता कि गुलामी की बेड़ियां आजादी की चाहत से ज्यादा मजबूत होती हैं।
-मुझे सिर्फ इतना पता है कि आज एक बहादुर पाकिस्तानी लड़की अपने पिता से मिली है और एक भारतीय पिता अपने पाकिस्तानी बेटी से मिला है।
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