ओस्लो। मलाला यूसुफजाई के जेहन में दहशतगर्दी झेलने के निशान गहरे जमे हैं। यही वजह है कि नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजे जाने के बाद जब ओस्लो में उन्होंने अपने स्कूल की यूनिफॉर्म देखी तो फफक कर रो पड़ीं। यह वही यूनिफॉर्म थी, जिसे मलाला ने तालिबान हमले के दिन पहना था। यूनिफॉर्म पर खून के दाग थे। जब मलाला के आंसू नहीं थमे, तो उनके साथ नोबेल साझा करने वाले देश के कैलाश सत्यार्थी ने उन्हें दिलासा दिया।
दोनों को बीते बुधवार ही नोबेल से नवाजा गया है। उनके सम्मान में ओस्लो में ‘नोबेल प्राइज एक्जीबिशन 2014 – मलाला एंड कैलाश’ लगाई गई थी। मलाला और सत्यार्थी ने इसका उद्घाटन किया। इसी एक्जीबिशन के जरिए मलाला की यह यूनिफॉर्म पहली बार दुनिया के सामने आई। यूनिफॉर्म को ग्लास केस में रखा गया था। मलाला जब आंसू नहीं रोक पाईं तो सत्यार्थी ने उनसे कहा- "तुम बहादुर हो, तुम बहादुर हो।"
क्या हुआ था हमले के दिन?
मलाला खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत के स्वात जिले में रहती थी। तालिबान ने वहां 2007 से कब्जा कर रखा था। दहशतगर्दी के कारण वहां 400 स्कूल बंद कर दिए गए थे। मलाला इसका विरोध कर रही थीं। वह बीबीसी के लिए डायरी लिखने लगी। 9 अक्टूबर 2012 को मलाला अपनी स्कूल बस से घर लौट रही थी। तभी एक आतंकी बस रोकर अंदर आया। उसने पूछा- मलाला कौन है? उसके स्कूल के साथी खामोश रहे लेकिन मलाला की तरफ ही देखने लगे। आतंकी समझ गया। उसने मलाला के सिर पर गोली दाग दी। बाद में मलाला को सर्जरी के लिए लंदन ले जाया गया। अब वह लंदन में ही पढ़ाई कर रही है।
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