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सेना से खारिज हुए, नौकरी से निकाले गए, कंप्यूटर बेचकर बने मीडिया किंग

7 वर्ष पहले
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माइकल ब्लूमबर्ग: बिजनेस टायकून
जन्म: 14 फरवरी 1942, बॉस्टन में
शिक्षा: इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, एमबीए

परिवार: पत्नी सुसन ब्राउन से 1993 में तलाक हो चुका है। दो बेटियां हैं जॉर्जिना और एम्मा।
चर्चा में क्यों: न्यूयॉर्क के मेयर के तौर पर अपना तीसरा कार्यकाल खत्म कर चुके इस बिजनेसमैन ने दोबारा अपनी कंपनी ब्लूमबर्ग एलपी ज्वॉइन करने की घोषणा की है। हालांकि, पहले उन्होंने इससे इनकार कर दिया था।
अकाउंटेंट पिता के घर जन्मे माइकल ब्लूमबर्ग ने 1964 में पढ़ाई पूरी की। फिर दो साल नौकरी तलाशते रहे। इसी दौरान अमेरिका वियतनाम युद्ध में कूद पड़ा। खाली घूम रहे ब्लूमबर्ग ऑफिसर कंडीडेट स्कूल में भर्ती होने चले गए, लेकिन फ्लैट फुट होने के कारण खारिज कर दिए गए। एक बार फिर नौकरी ढूंढने का सिलसिला शुरू हुआ। इस बार वॉल स्ट्रीट की कंपनी सोलोमन ब्रदर्स ने उन्हें 9000 डॉलर सालाना पैकेज पर रख लिया। यहां एक छोटे से कमरे में पसीने में तर बतर होकर बॉन्ड और स्टॉक सर्टिफिकेट का काम देखते।

हफ्ते में सातों दिन, 12 घंटे काम कर वे ट्रेनी से बॉन्ड ट्रेडर बन गए। उम्मीद से बढ़कर कंपनी का प्रॉफिट कराया। इससे खुश होकर मैनेजमेंट ने उन्हें पार्टनरशिप देकर इक्विटी ट्रेडिंग का हेड बना दिया। सात साल बाद कंपनी के सीईओ जॉन गटफ्रंड और बिली सोलोमन ने उन्हें सेल्स और ट्रेडिंग की पावरफुल पोजीशन से हटाकर मार्केट में नए-नए आए कंप्यूटर से जुड़ा काम देखने को कहा। उन्होंने इसे डिमोशन माना, लेकिन इसे नया अनुभव मानते हुए कुछ नहीं बोले।
1981 में कंपनी का अधिग्रहण होने पर ब्लूमबर्ग को नौकरी से निकाल दिया गया। बदले में उन्हें 10 मिलियन डॉलर मिले। इसके बाद किसी ने उन्हें नौकरी नहीं दी। तय किया कि वे अब खुद का काम शुरू करेंगे। चार बिलियन डॉलर लगाकर अपनी आईटी कंपनी इनोवेटिव मार्केटिंग सिस्टम खोल ली। इसमें वे ऐसा कंप्यूटर टर्मिनल बनाना चाहते थे, जो बॉन्ड मार्केट के बारे में जानकारी दे सके।

हर शनिवार वे कनेक्टीकट में एक इंजीनियर के साथ हार्डवेयर बनाने का काम करते। और अगर किसी पार्ट को मरम्मत की जरूरत पड़ती तो फ्लाइट से शिकागो जाते। यह सिलसिला तीन साल चला। फिर उन्होंने टर्मिनल बेचने के लिए वॉल स्ट्रीट की कंपनी मेरिल लिंच के यहां चक्कर काटने शुरू किए। वह सुबह-सुबह यहां जाते। किसी एम्प्लाई को अखबार पढ़ते देखते, तो कॉफी लेकर उसके पास पहुंच जाते। खुशामद कर उन्होंने 22 टर्मिनल बेचे। बदले में फिंच ने उन्हें 30 मिलियन डॉलर दिए और उनकी कंपनी की 30 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीद ली।
आगे जानिए: जब उनकी कंपनी बन गई शेयर मार्केट की जरूरत।