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म्यंमार में बौधधर्मियों की भीड़ ने ली 40 मुस्लिमों की जान

8 वर्ष पहले
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रंगून। पश्चिम म्यांमार के रोहिंग्या के एक गांव में बौद्धधर्मियों की भीड़ ने करीब 48 मुस्लिमों की जान ले ली। संयुक्त राष्ट्र ने गुरुवार को इस मामले की जानकारी दी। संयुक्त राष्ट्र ने म्यांमार सरकार से इस मामले की तेज और बिना किसी पक्षपात के जांच करने को कहा है। साथ ही दोषियों को सजा देने की अपील भी की है।
इधर, म्यांमार सरकार ने इन आरोपों का जोरदार खंडन किया है। राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने कहा कि वह यूएन के नरसंहार के दावे का विरोध करते हैं। यूएन की ओर से पेश किए गए तथ्य और आंकड़े पूरी तरह से गलत हैं।
रोहिंग्या के दू चार यार तान गांव में हुए इस नरसंहार को साल की सबसे भयंकर घटना के तौर पर देखा जा रहा है। इसमें बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों की मौत हुई है, जबकि ढाई लाख लोग बेघर हो गए हैं।
रोहिंग्या की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि बाहरी मीडिया और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के लिए वहां से जानकारी इकट्ठा करने के सीमित साधन हैं। ऐसे में उनके लिए मिली जानकारी को पुष्ट करना काफी मुश्किल हो जाता है।
फोर्टिफाई राइट्स के कार्यकारी निदेशक मैथ्यू स्मिथ ने उत्तरी राखिन राज्य के दू चार यार तान गांव में मानवीय सहायता के लिए काम करने वाले लोगों, स्वतंत्र पर्यवेक्षकों और पत्रकारों को आसानी से जाने देने की अपील सरकार से की है।
14 जनवरी की घटना के बाद ये गांव पूरी तरह खाली हो गया है और उसके बाद से सील कर दिया गया है। स्मिथ ने कहा कि बुधवार तक छोड़े हुए घरों में कुछ शव पड़े हुए थे।
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