नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी हिंदी में भाषण देने वाले हैं। ऐसा करने वाले वे दूसरे पीएम होंगे। हिंदी भाषण को 193 सदस्यों देशों के प्रतिनिधी भी समझे, इसके लिए खास इंतजाम भी किए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री का 15 मिनट का भाषण हिंदी में होगा, जिसे ट्रांसलेट करने के लिए संसद के दो अधिकारी साथ जा रहे हैं। पहली बार होगा, जब प्रधानमंत्री बोल रहे होंगे, उसी वक्त भाषण को हेडफोंस पर ट्रांसलेट किया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र की छह आधिकारिक भाषाओं में हिंदी नहीं है। आमतौर पर 6 भाषाओं इंग्लिश, फ्रांसिसी, स्पेनिश, रूसी, चीनी और अरबी के तुरंत अनुवाद की व्यवस्था है, लेकिन हिंदी के तुरंत अनुवाद की व्यवस्था नहीं है। इस बार खास ये है कि भारत की तरफ से तुरंत अनुवाद देने की व्यवस्था की जा रही है।
आखिर क्यों हो रहा ऐसा
आधिकारिक भाषाओं में से किसी एक में अनुवाद देना होगा। मोदी से पहले पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव और अटल बिहारी वाजपेयी भी हिंदी में संयुक्त राष्ट्र में बोल चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र में लिखा हुआ भाषण पढ़ने की परंपरा है। इसलिए मोदी का भाषण भी पहले लिखा जाएगा। प्रिपेयर्ड टेक्टर की भाषा है यूएन की। इसलिए अनुवाद की सुविधा रहती है। जो भी नेता बोलता है उसे बाद में ट्रांसलेट किया जाता है पहली बार हो रहा है कि पीएम की स्पीड का इतना इम्पेक्ट रहे कि पूरी दुनिया में असर रहे।