न्यूयॉर्क। नरेंद्र मोदी 21 साल के बाद पहली बार पांच दिन के दौरे पर अमेरिका जा रहे हैं। अमेरिका के व्यस्त दौरे में 27 सितंबर को वह संयुक्त राष्ट्र महासभा के 193 सदस्य देशों के सामने हिंदी में भाषण देंगे। यह दूसरा मौका होगा, जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण देगा। इससे पहले अटल बिहारी वाजपेयी साल 2002 में हिंदी में भाषण दे चुके हैं। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण था, क्योंकि वाजपेयी ने यह ऐतिहासिक भाषण राष्ट्र संघ के सहस्राब्दी वर्ष में दिया था। उस दौरान उन्होंने भारत के लिए परमाणु हथियार क्यों जरूरी है और भारत ने परमाणु परीक्षण क्यों किया। इन सभी गंभीर मुद्दों को तर्क के साथ दुनिया को बताया था।
आइए एक नजर डालते हैं अटल बिहारी वाजपेयी ने इस ऐतिहासिक भाषण में क्या कहा था....
परमाणु मुद्दे पर दिया सबसे प्रभावशाली भाषण
विकास के लिए राष्ट्रों के बीच शांति और लोकतंत्र की स्थापना आवश्यक है। शांति, लोकतंत्र और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। ये खेद का विषय है कि विश्व की शांति और सुरक्षा के लिए परमाणु युद्ध भय आज भी इस नई सदी में भी एक गंभीर खतरा बना हुआ है। पिछली सदी के शुरुआत में भारत परमाणु निशस्त्रीकरण के अभियान में सबसे आगे रहा है। हमने इस संबंध में अन्य देशों के साथ अपनी आवाज बुलंद की। लेकिन उसे अनसुना कर दिया गया। इसलिए 1998 में भारत को परमाणु हथियारों का विकास करने के लिए मजबूर होना पड़ा। क्योंकि परमाणु हथियार रखने वाले प्रमुख देशों ने परमाणु निशस्त्रीकरण की विश्वव्यापी मांग को अस्वीकार कर दिया था। इसके अलावा भारत के पड़ोस में परमाणु हथियारों के जमावड़े के कारण हमारी सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है। भारत ने अपने कटु अनुभवों से सीखा है कि शांति की रक्षा के लिए उसे शक्तिशाली होना पड़ेगा।
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