संयुक्त राष्ट्र। भारतीय प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए हिंदी में भाषण दिया। करीब आधे घंटे की स्पीच में उन्होंने मुख्य तौर पर आतंकवाद पर निशाना साधा।
पढ़िए उनकी स्पीच की पांच मुख्य बातें...
पाकिस्तान - प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत, अपने पड़ोसी देश से दि्वपक्षीय बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन सबसे पहले आतंकवाद को खत्म करना ज़रूरी है। मोदी ने कहा संयुक्त राष्ट्र महासभा में
कश्मीर मुद्दा उठाने का कोई फायदा नहीं। कश्मीर बाढ़ का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि फिलहाल, पीड़ितों की मदद करना ही हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने पड़ोसी देश में बाढ़ पीड़ितों की मदद का प्रस्ताव रखा था।
आतंकवाद - कश्मीर और पाकिस्तान मुद्दे के अलावा मोदी ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया, आतंकवाद से पीड़ित है और सबको यह अहसास हुआ है कि यह न्यायिक विफलता नहीं है। उन्होंने कहा, "आतंकवाद, हर दिन नया आकार और नया नाम धारण कर रहा है। उत्तर से लेकर दक्षिण तक, छोटा-बड़ा, हर देश आतंकवाद की चपेट में है।"
व्यापार व अर्थव्यवस्था - प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित व उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के बीच अच्छे संबंधों को विकास की ओर अच्छी पहल बताया। उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण से कई संभावनाओं का जन्म हुआ है और आर्थिक समस्याएं दूर हो रही हैं।
एक मंच की ज़रूरत - मोदी ने स्पीच की शुरुआत में कहा कि भारत, सिर्फ तरक्की चाहता है। उन्होंने दुनियाभर के देशों को अलग-अलग मंच पर इकट्ठे होने की आलोचना करते हुए कहा कि सबको एकसाथ आगे आना होगा। उन्होंने कहा, "संयुक्त राष्ट्र जैसा मंच होते हुए भी हम सब अलग-अलग क्यों हैं। क्यों हम अलग-अलग G समूहों में विभाजित हैं? G-5, G-7, G-20 की जगह G ऑल होना चाहिए।" स्पीच के अंत में उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के 70 साल पूरे होने पर सभी देशों को मिलकर काम करने की दिशा में सोचना चाहिए।
योग के फायदे - वैश्विक मंच पर प्रधानमंत्री ने योग के फायदे भी गिनाए। उन्होंने कहा, "हमें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के बारे में सोचना चाहिए।" उन्होंने कहा कि यह सिर्फ व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका है।