रोज अपनी मौत का इंतजार करते थे यहूदी, ऐसा था हिटलर का टॉर्चर कैम्प

4 वर्ष पहले
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इंटरनेशनल डेस्क.   ब्रिटेन के प्रिंस विलियम और उनकी वाइफ केट मिडलटन इन दिनों पोलैंड की यात्रा पर हैं। इस दौरान रॉयल कपल यहां हिटलर द्वारा बनवाए गए टॉर्चर कैम्प भी पहुंचे। रॉयल कपल ने इस कैम्प को जंग की सबसे दर्दनाक याद बताया। बता दें कि 1933 में जर्मनी की सत्ता पर काबिज हुए एडोल्फ हिटलर ने यहां एक नस्लवादी साम्राज्य बनाया। यहूदियों के लिए हिटलर की ये नफरत होलोकॉस्ट के रूप में सामने आई। यहूदियों को खत्म करने का सिलसिला मई से पोलैंड में खुले ऑशविच कन्सन्ट्रेशन कैम्प से शुरू हुआ था। ऑशविच कैम्प यानी मौत का दूसरा नाम...

- पोलैंड के इस कैम्प में धर्म, नस्ल, विचारधारा या शारीरिक कमजोरी के नाम पर लाखों लोगों को गैस चेंबर में भेज दिया जाता था।
- यहूदियों, राजनीतिक विरोधियों, बीमारों और समलैंगिकों से जबरन काम लिया जाता था।
- कैम्प ऐसी जगह और इस तरह बनाया गया था कि वहां से भाग पाना नामुमकिन था।
- बूढ़े और बीमारों को गैस चेंबर में मौत दे दी जाती थी। कैम्प में चार क्रिमेटोरियम थे, जहां हर दिन 4,700 लाशें जलाई जा सकती थीं।
- जो गैस चेंबर से बच जाते थे, उन्हें काम करना पड़ता था।
- ऑशविच कैम्प के पास इंडस्ट्रियल एरिया था। बिजनेसमैन बंदियों को उधार पर काम करवाने के लिए लेते थे।
 
क्या था होलोकॉस्ट?
- होलोकॉस्ट इतिहास का वो नरसंहार था, जिसमें छह साल में करीब 60 लाख यहूदियों की हत्या कर दी गई थी।
- इनमें 15 लाख सिर्फ बच्चे थे। कई यहूदी अपनी जान बचाकर देश छोड़कर भाग गए। कुछ कन्सनट्रेशन कैम्पों में क्रूरता के चलते तिल-तिल कर मरे।
- ऑशविच यातना कैम्प यहूदियों का खात्मा करने की नाजियों की खूनी स्ट्रैटजी का सिंबल बन गया था।
 
आजाद होने तक मारे गए थे 11 लाख लोग
- 27 जनवरी 1945 को सोवियत रेड आर्मी द्वारा आजाद किए जाने तक ऑशविच कैम्प में 11 लाख लोगों की मौत हो चुकी थी।
- कैम्प में बच गए करीब सात हजार लोगों को रिहा कराया गया।
- 1947 में ही कैम्प को पोलिश पार्लियामेंट ने एक कानून पास कर म्यूजियम में बदल दिया।
 
 
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