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पांचवा न्यूक्लियर टेस्ट कर सकता है नॉर्थ कोरिया, US इंटेलिजेंस ऑफिसर का दावा

5 वर्ष पहले
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सियोल. नॉर्थ कोरिया पांचवां न्यूक्लियर टेस्ट की कोशिश में है। वह एक रिएक्टर में तेजी से प्लूटोनियम तैयार कर रहा है। साथ ही, प्योंगयांग में इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम बनाने के लिए भी काम शुरू कर चुका है। यूएस इंटेलिजेंस एजेंसी ने यह दावा किया है। बता दें कि नॉर्थ कोरिया ने इसी महीने लॉन्ग रेंज मिसाइल और पिछले महीने हाइड्रोजन बम का टेस्ट किया था। यांगयोन के बंद पड़े रिएक्टर को क्यों शुरू किया गया...

- यूएस इंटेलिजेंस चीफ जेम्स क्लैपर ने बताया कि नॉर्थ कोरिया यांगयोन के एक रिएक्टर में प्लूटोनियम एनरिचमेंट पर काम कर रहा है।
- बड़ी बात ये कि जिस रिएक्टर में काम शुरू किया गया है, उसे 2007 में बंद कर दिया गया था।
- क्लैपर के मुताबिक, "जल्द ही नॉर्थ कोरिया के पास न्यूक्लियर टेस्ट करने के लिए बड़ी मात्रा में प्लूटोनियम होगा।"
- "अगले कुछ हफ्तों या महीनों में वो फिर से न्यूक्लियर टेस्ट कर सकता है।"
- "नॉर्थ कोरिया का इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम अमेरिका के लिए बड़ा खतरा हो सकता है।"
- एक्सपर्ट्स के मुताबिक, "पूरी तरह ऑपरेशनल होने के बाद यांगयोन रिएक्टर में हर साल एक न्यूक्लियर बम बनाने लायक प्लूटोनियम बनाया जा सकता है।"
- बता दें कि एक एटम बम बनाने में चार किलो प्लूटोनियम की जरूरत होती है। इतना प्लूटोनियम 20 किलोटन फोर्स का ब्लास्ट करने में कैपेबल होगा।
- नॉर्थ कोरिया 2006, 2009, 2013 और इसी साल जनवरी में न्यूक्लियर टेस्ट कर चुका है।
क्यों शुरू हुआ यांगयोन रिएक्टर?
- प्योंगयांग से 90 किलोमीटर दूर स्थित इस रिएक्टर को पहले 2013 तक शुरू करने की बात कही गई थी।
- यह रिएक्टर न्यूक्लियर वेपन्स के लिए प्लूटोनियम का मेन सोर्स है।
- बता दें कि दुनिया की छह बड़ी एटमी ताकतों के साथ नॉर्थ कोरिया की बातचीत 2009 से ही बंद है। अमेरिका नॉर्थ कोरिया के न्यूक्लियर प्रोग्राम को रोकना चाहता है।
- हालांकि, अब तक यह साफ नहीं हो सका है कि नॉर्थ कोरिया की न्यूक्लियर ताकत कितनी है। (नॉर्थ कोरिया की मिसाइल से डरा US? एशिया में लगाएगा मिसाइल डिफेंस सिस्टम, पढ़ें पूरी खबर)

क्या है यांगयोन न्यूक्लियर साइंटिफिक रिसर्च सेंटर
- यांगयोन न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर की शुरुआत नॉर्थ कोरिया और यूएसएसआर (अब रूस) के बीच 1950 में हुई डील के बाद हुई थी।
- इस पर 1961 में काम शुरू हुआ और 1964 में यह बन कर तैयार हो गया।
- इसे बनाने में करीब 3321 करोड़ रुपए (1962 में यूएस डॉलर की कीमत के मुताबिक) खर्च हुए थे।
- सेंटर को 1965 में सोवियत यूनियन से रिसर्च के लिए IRT-2000 रिएक्टर मिला था।
- नॉर्थ कोरिया के न्यूक्लियर रिसर्च और डेवलपमेंट में इस सेंटर को सबसे अहम माना जाता है।
- यह सेंटर जनरल डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी के चार खास न्यूक्लियर इंस्टीट्यूट्स में से एक है।
- बाकी तीन संगठनों में आइसोटोप एप्लिकेशन कमेटी, द एटॉमिक एनर्जी कमेटी और प्योंगयांग एटॉमिक एनर्जी शामिल हैं।
यांगयोन न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर में और 10 रिसर्च इंस्टीट्यूट आते हैं
एटॉमिक एनर्जी रिसर्च इंस्टीट्यूट
आइसोटोप प्रोडक्शन लेबोरेट्री
न्यूट्रॉन इलेक्ट्रॉनिक्स रिसर्च इंस्टीट्यूट
न्यूक्लियर इलेक्ट्रॉनिक्स रिसर्च इंस्टीट्यूट
न्यूक्लियर मटीरियल्स रिसर्च इंस्टीट्यूट
न्यूक्लियर फिजिक्स रिसर्च इंस्टीट्यूट
रेडिएशन प्रोटेक्शन रिसर्च इंस्टीट्यूट
रेडियो-केमिस्ट्री रिसर्च इंस्टीट्यूट
रिएक्टर डिजाइन रिसर्च इंस्टीट्यूट
यूरेनियम रिसोर्स डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट
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