दुबई। संयुक्त अरब अमीरात की जेलों में बंद ज्यादातर भारतीय स्वदेश नहीं लौटना चाहते। उनकी इच्छा है कि वे यूएई की जेलों में मिल रही बेहतरीन सुख सुविधाओं के बीच ही अपनी बची सजा काटें।
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में भारतीय राजदूत टीपी सीताराम ने बताया कि नवंबर 2011 में भारत और यूएई के बीच कैदियों की अदला-बदली का समझौता हुआ था। इसके तहत यहां की जेलों में बंद 80 प्रतिशत भारतीय कैदी देश लौट कर अपनी सजा पूरा करने का आवेदन करने के पात्र हैं। लेकिन केवल 10 प्रतिशत ही स्वदेश लौटने को तैयार हैं।
अबु धाबी स्थित सेंट्रल जेल का दौरा करने के बाद राजदूत ने खलीज टाइम्स को बताया कि करीब 120 कैदियों के आवेदन मिले हैं जो अपनी सजा भारतीय जेलों में काटना चाहते हैं।
क्यों नहीं आना चाहते
1. यूएई की जेलों में बेहतर सुविधाएं हैं
2. कई लोगों ने अपने घर वालों को नहीं बताया कि वे जेल में हैं।
3. कुछ कैदी सजा माफ करवाने के लिए कानूनी मदद मांग रहे हैं।